मां

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मां दुर्लभ था तुम्हारे स्नेह
का आकाश।
स्मृतियों में आज भी
सदा रहती हो साथ।
फिर कैसे मान लें
यह है
एक दिन की बात।।
-दिलीप अग्निहोत्री

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