Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 569 सब तरफ़ चुटकुले हैं और हिंसा है। सब तरफ़ सारगर्भित मूर्खताएँ हैं। सब दिवस अब मूर्ख दिवस हैं। अविनाश मिश्र
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन