Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, July 2
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»साहित्य

    श्रद्धांजलि: हिन्दुस्तानी के सबसे बड़े हास्य लेखक थे मुस्ताक अहमद यूसिफी

    By July 17, 2018 साहित्य No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 717

    वीरेन्द्र जैन

    मैं अपने को हिन्दी हास्य व्यंग्य का ठीकठाक पाठक मानता हूं और उसके आधार पर कह सकता हूं कि उर्दू के लेखक मुस्ताक अहमद यूसिफी के बराबर का हास्य लेखक अब तक मेरी नजरों से नहीं गुजरा। यह भी तब जब कि मैंने उन्हें केवल उस सब कुछ के माध्यम से जाना है जो देवनागरी में प्रकाशित हुआ है। मैंने इस विषय के अन्य अध्येताओं से भी बात की और वे सभी मेरी बात से सहमत थे। वे ऐसे लेखक थे जो पाकिस्तान में अविभाजित हिन्दुस्तान का प्रतिनिधित्व करते थे। उनके पूरे लेखन से आप पता ही नहीं लगा सकते कि हिन्दुस्तान और पाकिस्तान अलग अलग मुल्क हो चुके हैं।

    साहित्य से जुड़े जितने भी पाकिस्तान के श्रेष्ठ सम्मान हैं वे सब उन्हें मिले हैं, जैसे 1999 में पाकिस्तान के प्रैसीडेंट द्वारा सितारा-ए- इम्तियाज, 2002 में पाकिस्तान के प्रैसीडेंट द्वारा हिलाल-ए- इम्तियाज, कायदे आज़म मैमोरियल मैडल, 1990 में श्रेष्ठ किताब के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार पाकिस्तान अकादमी आफ लैटर्स, हिजरा अवार्ड, व अदमजी अवार्ड फर बैस्ट बुक, आदि।  ऐसा कैसे सम्भव हो सका यह बात उनके जीवन परिचय को पढ कर समझ में आ जाती है। 

    यूसिफी जी का जन्म 4 सितम्बर 1923 को राजस्थान के टोंक में हुआ था। उनके पिता पठान थे और यूसुफजई जनजाति से आते थे। उनकी वंश परम्परा उन लोगों से जुड़ती है जो महमूद गज़नवी के साथ इस क्षेत्र में आये थे और लम्बे समय तक शासक वर्ग से सम्बन्धित रहे।  उनके पिता जो जयपुर के पहले पढे लिखे मुसलमान थे पहले जयपुर नगर निगम के चेयरमैन और बाद में जयपुर विधानसभा के अध्यक्ष रहे। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा राजपूताने में हुयी तथा बाद में उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से बीए किया। आगे उन्होंने अलीगढ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से फिलोस्फी में एमए और एलएलबी किया। विभाजन के बाद उनका परिवार कराची में रहने लगा था। 1950 में उन्होंने मुस्लिम कामर्सियल बैंक में सेवायें प्रारम्भ की और डिप्टी जनरल मैनेजर हो गये। 1965 में वे एलाइड बैंक लिमिटेड में मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त हुये। 1974 में वे यूनाइटिड बैंक लि. के प्रैसीडेंट बने, व 1977 में पाकिस्तान बैंकिंग काउंसिल के चेयरमैन चुने गये। अपनी श्रेष्ठ बैंकिंग सेवाओं के लिए उन्हें कायदे आज़म मैमोरियल मैडल प्रदान किया गया।

    एक बार में मुम्बई गया तो रामावतार चेतन ने कहा कि शरद जोशी से मिल कर अपनी किताब दे आना। मैंने यही किया तो शरद जी ने पूछा कि मुम्बई कैसे आये थे। मैंने कहा कि यूं ही बिना किसी काम के आया था। वे बोले कि आते रहना चाहिए। क्योंकि जीवन शैली का जो कंट्रास्ट सामने आता है वह व्यंग्य को बल देता है। उन्होंने मुम्बई और भोपाल के आदमी की गति के अंतर का रोचक चित्रण कर के समझाया। जिसके जीवन में जितनी विविधता होगी उसका व्यंग्य भी उतना ही तेज होगा।

    यूसिफी जी ने अध्य्यन, और नौकरी में जितनी विविधिता का सामना किया उन्हें उतने ज्यादा चरित्र मिले। कानपुर की ग्वालिन से लेकर अमृतसर के सिखों, व वलूची पठानों से लेकर मुहाजिरों तक के वर्णन बताते हैं कि उन्होंने कितनी निरपेक्षता के साथ सूक्ष्म निरीक्षण किया हुआ है। हास्य व्यंग्य के लेखक को जनक जैसे सन्यासी की तरह समस्त रागों से असम्पृक्त होकर देखना होता है। उनके छोटे छोटे वाक्यों में जो चुटीले जुमले होते हैं, वे मुस्कराने और खिलखिलाने के लिए विवश कर देते हैं। मजहबियों पर कुछ उदाहरण देखिए-

    • जो मुल्क जितना गरीब होगा, उतना ही आलू और मजहब का चलन ज्यादा होगा
    • मुसलमान किसी ऐसे जानवर को मुहब्बत से नहीं पालते जिसे जिबह करके खा न सकें।
    • नाई की जरूरत सारी दुनिया को रहेगी जब तक कि सारी दुनिया सिक्ख धर्म ना अपना ले और सिक्ख ऐसा कभी होने नहीं देंगे।
    • इस्लाम के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानी बकरों ने दी है।
    • इस्लाम की दुनिया में आज तक कोई बकरा स्वाभाविक मौत नहीं मरा
    • कुछ लोग इतने मजहबी होते हैं कि जूता पसन्द करने के लिए भी मस्जिद का रुख करते हैं

    वैवाहिक सम्बन्धों और प्रेम से सम्बन्धित कुछ जुमले देखिए –

    • हमारे जमाने में तरबूज इस तरह खरीदा जाता था जैसे आजकल शादी होती है, सिर्फ सूरत देख कर।
    • जो ज़हर देकर मारती तो दुनिया की नजर में आ जाती, अन्दाज-ए-कातिल तो देखो, हमसे शादी कर ली.
    • मर्द की आंख और औरत की जबान का दम सबसे आखिर में निकलता है
    • उस शहर की गलियां इतना तंग थीं कि अगर मुख्तलिफ जिंस आमने-सामने आ जायें तो निकाह के अलावा कोई गुंजाइश नहीं रहती।
    • मुहब्बत अंधी होती है, लिहाजा औरत के लिए खूबसूरत होना जरूरी नहीं, बस मर्द का अंधा होना काफी होता है।
    • बुढ़ापे की शादी और बैंक की चौकीदारी में जरा भी फर्क नहीं, सोते में भी एक आंख खुली रखनी पड़ती है।

    कुछ अन्य उदाहरण देखिए-

    • लफ्जों की जंग में फतह किसी भी फरीक की हो, शहीद हमेशा सच्चाई होती है।
    • दुश्मनों के तीन दर्जे हैः दुश्मन, जानी दुश्मन और रिश्तेदार।
    • आदमी एक बार प्रोफेसर हो जाए तो उम्र भर प्रोफेसर ही रहता है, चाहे बाद में समझदारी की बातें ही क्यों ना करने लगे।
    • सिर्फ 99% पुलिस वालों की वजह से बाकी एक प्रतिशत भी बदनाम हैं।

    हिन्दी में लफ्ज़ सम्पादक तुफैल चतुर्वेदी ने न केवल उनकी पुस्तकों के अनुवाद ही किये हैं अपितु उन्हें प्रकाशित भी किया है। ये किताबें हाथों हाथ बिक भी गयीं। उनकी 1961 में किताब ‘चिराग तले’ आयी तो 1969 में ‘खाकम बा दहन’ 1976 में ‘जर्गुरस्त’ तो 1990 में ‘आब-ए-गुम’, 2014 में ‘शामे-ए- सैरे यारां’ आयी।अनेक पुस्तकों के अनुवाद अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में हुये हैं। स्वस्थ होने और समय रहते वे सेमिनारों और विभिन्न साहित्यिक कार्यक्रमों में भागीदारी करते रहे।

    गत 20 जून 2018 को वे नहीं रहे और उर्दू व हिन्दी का या कहें कि हिन्दुस्तानी भाषा और संस्कृति का बहुत बड़ा लेखक विदा हो गया।

    Keep Reading

    When the temple became the means... and propriety fell silent...!

    जब मंदिर बना ज़रिया… और मौन हुई मर्यादा…!

    3 मिनट की झपकी एक ईमानदार इंसान की इज़्ज़त लगभग छीन लेती

    Many writers are caught in a labyrinth of duties!

    कर्त्तव्यों के चक्रव्यूह में घिरे हैं कई कलमकार!

    When a clever merchant and an innocent king taught a lesson to the forest and the sea...!

    जब चतुर व्यापारी और मासूम राजा ने दी जंगल और समंदर को सीख तब..!

    Raja ka Aaina (The King's Mirror): The King's Mirror is no ordinary mirror.

    राजा का आईना : राजा का आईना कोई साधारण आईना होता नहीं

    Akhilesh Yadav sang the praises of the bicycle in a viral post, highlighting that it is an excellent mode of transport—affordable in price yet immensely useful.

    अखिलेश यादव ने साइकिल की महिमा गाई, पोस्ट वायरल, साइकिल भी है खूब सवारी थोड़े दाम काम दे भारी

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    अयोध्या चंदा चोरी मामले में SIT को मिला अतिरिक्त समय

    July 1, 2026
    CM Yogi launches 'School Chalo Abhiyan' from Saharanpur

    सीएम योगी ने सहारनपुर से किया ‘स्कूल चलो अभियान’ का शुभारंभ

    July 1, 2026
    Panic among traders following the Aliganj fire incident!

    अलीगंज अग्निकांड के बाद व्यापारियों में मचा हड़कंप!

    July 1, 2026
    Ram Mandir offering theft: "Only small fish caught; the big crocodiles are still at large"

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी: “सिर्फ छोटी मछलियां पकड़ी गईं, बड़े मगरमच्छ अभी बाकी”

    July 1, 2026
    Akhilesh Yadav's Birthday: A massive turnout of party workers; a 'Green Pledge' fair held!

    अखिलेश यादव का जन्मदिन: कार्यकर्ताओं का जनसैलाब, लगा ‘हरित संकल्प’ का मेला!

    July 1, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading