आपकी बात फेसबुक के साथ: अंशुमाली रस्तोगी
मजनू भी देश की अर्थव्यवस्था की खास रीढ़ हैं। अगर ये न हों तो गिफ्ट्स का कारोबार ठंडा पड़ जाए। लेकिन यह दुखद है कि वित्तमंत्री साहिबा ने देश के मजनूओं के लिए अपने बजट में कुछ भी न रखा। न उन्हें अपने प्रोफेशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए कोई प्रावधान ही पेश किया। इस बजट से देश की मजनू बिरादरी में गहरा शोक है। आलम यह है कि कल दोपहर से अभी तक मुझे अपने मोहल्ले में एक भी मजनू अपनी महबूबा के लिए गिफ्ट लेता हुआ नजर न आया है। जबकि वेलेंटाइन डे सिर पर है।
यों भी पटने-पटाने का मौसम शुरू हो चुका है। मैं वित्तमंत्री साहिबा से, देश के मजनूओं के बिहाफ पर, पूछना चाहता हूं कि कैसे वे (मजनू लोग) आगे आने वाले डेज को हंसी-खुशी मनाएंगे? मोबाइल फोन तक आपने महंगे कर दिए। डेटा पहले ही महंगा हो चुका है। इतनी भीषण महंगाई में इश्क या फ़्लर्ट करना मजनूओं के लिए आसान न रहा। क्या ये दिन देखने के लिए ही उन्होंने मोदी जी को वोट दिया था?
मैं देश भर के मजनूओं से अपील करता हूं कि वे बजट में अपनी ‘उपेक्षा’ के खिलाफ जंतर-मंतर या फिर शाहीन बाग का रुख करें। बात निकलेगी तो फिर दूर तलक ही जानी चाहिए।







