मंहगी बिजली को लेकर सपा ने फिर किया विस में विरोध, कहा: दरें वापस हों

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सरकार जनविरोधी है और मूल्य वृद्धि कर जनता के ऊपर अतिरिक्त भार डाला गया है: सपा


योगी बोले, सपा अपने लोकतंत्र विरोधी चेहरे के साथ सदन की कार्यवाही बाधित कर रही

लखनऊ 15 दिसम्बर। उत्तर प्रदेश में विद्युत दरों में योगी सरकार द्वारा की गयी वृद्धि को लेकर एक बार फिर प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने विधानसभा में जमकर हंगामा किया। सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए सपा सदस्यों ने मूल्य वृद्धि को तत्काल वापस लिए जाने की पुरजोर मांग की। हंगामें के चलते सदन की कार्यवाही बाधित हुई। वहीं नेता सदन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा सदस्यांे के आचरण की निन्दा करते हुए कहा कि सरकार चर्चा और उत्तर देने के लिए तैयार है लेकिन सपा के लोग चर्चा करना नहीं चाहते हैं क्योंकि चर्चा होगी तो इनके काले कारनामे उजागर हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि सपा अपने लोकतंत्र विरोधी चेहरे के साथ सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है।

उप्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को भी सपा ने सदन की अन्य सभी कार्यवाही को रोककर बढ़ी हुई बिजली की दरों पर चर्चा कराने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष सपा के राम गोविन्द चैधरी ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बढ़ी हुई विद्युत दरों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि विपक्ष कल भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहा था और आज भी उसकी यही मांग है। उन्होंने कहा कि यह सरकार जनविरोधी है और मूल्य वृद्धि कर जनता के ऊपर अतिरिक्त भार डाला गया है। वहीं बसपा और कांग्रेस सदस्यों ने भी इसी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने की बात की। उधर, विधानसभा अध्यक्ष ह्नदय नारायण दीक्षित द्वारा प्रष्नकाल के बाद चर्चा कराने की बात कहने पर उत्तेजित सपा सदस्य वेल में आ गए और ‘बिजली की बढ़ी दरें वापस लो-वापस लो’ के नारे लगाने लगे।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि पिछली सरकार में तो बिजली आती ही नहीं थी इसीलिए लोगों ने अपनी बेटियों के नाम बिजली रख दिया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार शहरों में 24 घण्टे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घण्टे बिजली उपलब्ध करा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सुविधा लेनी है तो मूल्य तो चुकाना ही होगा। वहीं ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि सपा सदस्य सदन को गुमराह करने की कोषिष कर रहे हैं। यह लोग गरीब, किसान, विकास और आमजन विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने गरीबों और किसानों को राहत दी है। तीन रूपए 74 पैसे सरकार स्वयं वहन कर रही है। जबकि पूर्ववर्ती सपा सरकार में बिजली ही नहीं मिलती थी। केवल कुछ वीआईपी जिलों में ही विद्युत आपूर्ति होती थी। उन्होंने कहा कि सपा सदस्य सस्ती लोकप्रियता के लिए यह नाटक नौटंकी कर रहे हैं। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कई बार सदन को व्यवस्थित करने का असफल प्रयास किया। बाद में उन्होंने पहले 15 मिनट के लिए स्थगित किया जोकि बाद में 12ः20 बजे तक बढ़ा दिया गया। ऐसे में प्रष्नकाल हंगामें की भेंट चढ़ गया।

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी सपा सदस्यों का हंगामा जारी रहा। इस दौरान सदन में पहुंच चुके नेता सदन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोर्चा संभालते हुए हंगामा कर रहे सपा सदस्यों को जमकर खरी खोटी सुनायी। उन्होंने कहा कि सत्र शुरू होने से पहले जब सर्वदलीय बैठक हुई थी तब विपक्ष ने ज्यादा से ज्यादा सदन चलाने पर जोर दिया था। वहीं सरकार ने हर मुद्दे पर चर्चा कराने एवं उत्तर देने की बात कही थी। लेकिन सपा सदस्यों का जो आचरण है उससे सच्चाई सामने आ गयी है। उन्होंने कहा कि मात्र 47 सदस्य पूरी विधानसभा को बंधक बना लें यह उचित नहीं है और शेष 355 सदस्यों के हितों पर यह कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि यदि यह बिजली की दरों पर बहस करते तो इनके कार्यकाल के काले कारनामे उजागर हो जाते।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली की दरें सिर्फ 80 पैसे से बढ़ाकर एक रूपया दस पैसा की है। साथ ही विद्युत वितरण की समान व्यवस्था भी की है। जबकि पूर्ववर्ती सरकार में किसान को बिजली नहीं मिलती थी और वह अपना ट्यूबवेल डीजल से चलाता था। तब किसान को एक यूनिट के लिए 25 रूपए खर्च करने पड़ते थे। जबकि आज किसान को बिजली मिल रही है और वह भी एक यूनिट मात्र एक रूपए दस पैसे में। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अपने लोकतंत्र विरोधी चेहरे के साथ सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा करने और उत्तर देने के लिए भी तैयार है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सपा सदस्यों के आचरण पर अब उसे विचार कर कोई कदम उठाना चाहिए।

मुख्यमंत्री जब सदन में अपना वक्तव्य दे रहे थे तब भी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे। इस बीच बसपा सदस्यों ने जहां सदन से बहिर्गमन किया वहीं कांग्रेस के सदस्य अपने स्थान पर खड़े रहे। बाद में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि पूर्व में जब भाजपा विपक्ष में थी तब हमने नेता सदन के भाषण के दौरान हंगामा नहीं किया बल्कि उन्हें सुना या फिर बहिष्कार किया। लेकिन आज नेता सदन के बोलते समय जो आचरण किया गया वह निंदनीय है और सपा के इस कृत्य हम घोर निंदा करते हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने भी नेता सदन के भाषण के दौरान हंगामे को खेदजनक करार दिया। वहीं हंगामें और शोरगुल के बीच एजेण्डे में शामिल आज की कार्यवाही आनन-फानन में ही निपटाकर सदन सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

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