सार्स और निपाह के बाद अब एक और खतरनाक वायरस से दुनिया हिली!

0
406

यदि हम गौर से देखें तो दुनिया के किसी न किसी कोने में प्रति वर्ष किसी ऐसी खतरनाक बीमारियों के वायरस फैलने की खबरें आती रहती है जिसका आज के समय मे कोई इलाज संभव नही है और इसके साथ ही इस तरह के वायरसों से होने वाली बीमारियों के खतरे सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाते हैं। ऐसे में सिर्फ सावधानी और बचाव ही मुख्य रास्ता है। बता दें कि इसे पहले भी कुछ इसी तरह लक्षण से मिलते खतरनाक सार्स और निपाह वायरस से भी दुनिया कांप चुकी है।

जलवायु परिवर्तनों से हम मनुष्यों के जीवन शैलियों एवं शहरों से लेकर गली, बस्तियों मोहल्लों में निवास करने वाले लोगों की जीवनशैली में असंतुलन के पैदा हो जाने के कारण हम कुछ ऐसे खतरनाक जीवाणुओं की चपेट में आ जाते हैं जिससे हमारा जीवन संकट में पड़ जाता है लेकिन इस तरह के वायरस हम मनुष्यों के शरीर में इतनी तेजी के साथ फैलती है कि जिसका उपचार आज के आधुनिक काल के चिकित्सा विज्ञान के पास भी नही होने से अक्सर इसका इलाज करने में हम लाचार हो जाते है।

यहाँ यह बताना जरुरी है कि चीन में फैले कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में एक चिंता की लहर दौड़ गई है। यदि द्रुतगति से फैलते इस वायरस के विस्तार को जल्द से जल्द रोका नही गया तो हमारे सम्पूर्ण मानव जाती के प्राणों पर एक बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान ने ऐसा माना है कि इस वायरस के संक्रमण की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई है, लेकिन धीरे-धीरे अब यह चीन के कई शहरों में भी तेजी के साथ फैल चुका है और इस वायरस के चपेट में लगभग आठ सौ से भी अधिक लोगों के आ जाने से अब तक यह वायरस पच्चीस लोगों को मौत के मुहँ में धकेल चुकी है।

भारत में भी फ़ैल चुका है खतरनाक निपाह वायरस

कोरोना वायरस दरअसल वायरसों का एक बड़ा समूह है जिसका जानवरों में पाया जाना आम बात है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीएस) के अनुसार, कोरोना वायरस जानवरों से मनुष्यों तक आसानी से पहुंच जाता है। नया चीनी कोरोनो वायरस, सार्स वायरस की तरह है। इसके संक्रमण से बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ़ें नाक का बहना एवं गले में खराश जैसी समस्याएं उत्त्पन्न हो जाती हैं। यह इंसानों में बहुत जल्दी फैलती है।

हांगकांग विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के वायरोलॉजिस्ट लियो पून, जिन्होंने सबसे पहले इस वायरस को डिकोड किया था, उन्हें लगता है कि यह संभवतः जानवरों से शुरू होकर हम मनुष्यों में भी फैल जाता है।

कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के विश्लेषण से यह बात सामने निकल कर आयी है कि यह हम मनुष्यों को संक्रमित करने की क्षमता रखने वाले अन्य कोरोना वायरस की तुलना में सार्स ज्यादा प्रभावशाली है। आज से लगभग अठारह साल पहले सार्स के कहर से लगभग आठ सौ लोगों की मौत हो गई थी। वर्तमान समय मे फैली इस वायरस की गंभीरता का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को कोरोना वायरस की चुनौतियों के मद्देनजर आपात बैठक तक बुलाना पड़ा है। चीन के जिस वुहान शहर में इस वायरस का उद्गम स्थान माना गया है, यह शहर फिलहाल एक तरह से बंद किया जा चुका है और यहां के सार्वजनिक यातायात को फिलहाल रोक दिया गया है।

इस संक्रमण के मद्देनजर वहां के लोगों को अपने ही शहर में रहने की सलाह दी जा चुकी है। इसके अलावा भी अमेरिका,थाइलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी इस संक्रमण से प्रभावित कुछ मामले पकड़ में आये हैं। मुख्यतः वुहान शहर से होकर वापस आने वाले लोगों में इस वायरस से संक्रमीत सबसे अधिक लोग में पाया गया है। चूंकि हमारा देश चीन का पड़ोसी होने के कारण कई स्तरों पर दोनों ही देशों के मध्य लोगों की लगातार आवाजाही बनी रहती है, इसलिए स्वाभाविक है कि इस पर मुख्यतः सावधानी रखा जयें। इस तरह के संक्रमण की जांच के लिये हमारे देश की राजधानी सहित अन्य सात हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की भी व्यवस्था की गई है कि जिससे विशेष कर चीन से लौटे यात्रियों में संक्रमण से प्रभावित होने की गहन जांच की जा सके।

सबसे अधिक परेशानी वाली बात यह है कि हमारे यहां की परिस्थितियों में सामान्यतः सर्दी-जुकाम को एक सामान्य इंफेक्शन की तरह देखा जाता है और लोग इसे लेकर अधिक परेशान भी नहीं होते हैं, बल्कि इसे सामान्य बात कहकर टाल देते हैं और डॉक्टर से सलाह लिये बिना ही अपने स्तर से कुछ दवाइयां दवाई की दुकानों से खरीद कर खा लेते हैं। ताजा चुनौती इसलिए और भी अधिक गंभीर हो जाती है क्योंकि कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले व्यक्ति में ठीक वैसे ही लक्षण दिखायी देते हैं, जैसे कि एक साधारण से सर्दी-जुकाम से पीड़ित व्यक्ति में देखने को मिलते हैं। जैसे कि सिर में दर्द, नाक का बहना, खांसी, गले में खराश एवं बुखार, बार-बार छींकें आना इत्यादि के अतिरिक्त निमोनिया का होना भी पाया जाता है।

यदि इसे देश में साधारणतः होने वाली मौसमी बीमारियों की ही तरह देखा गया तो शायद इस वायरस से उत्यन्न गंभीरता को न समझ कर इसकी अनदेखी करना आम बात होगी, क्योंकि इससे संक्रमित लोगों में भी सर्दी-जुकाम के लक्षण होते हैं, लेकिन इसका असर गंभीर होने के साथ ही साथ प्राणघातक भी हो सकते है। कियूंकि जाहिर सी बात है कि इस संक्रमण से प्रभावित व्यक्ति के उपचार मात्र अधिक से अधिक सावधानियां रख कर ही इसका सामना किया जा सकता है, क्योंकि अभी तक इस वायरस को बेअसर कर खत्म करने वाली कोई भी टीका चिकित्सा विज्ञान में अन्वेषण नही हो पाया है।

  • प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here