अब स्कूलों में ‘यस सर’ नहीं, जय हिंद’ बोलेंगे छात्र !

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स्कूली पाठ्यक्रम में धा‎र्मिक पुस्तकें भी शा‎मिल करेगी सरकार

नई दिल्ली, 16 मार्च। स्कूलों में अलग- अलग धर्मों के छात्रों के बीच धार्मिक सहनशीलता को बढ़ावा देने के ‎लिए केंद्र सरकार की ओर से एक सुझाव आया है ‎जिसमे स्कूली पाठ्यक्रम में अन्य विषयों के साथ-साथ धार्मिक किताबें भी शामिल करने की बात कही गई है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को कुछ ऐसे ही सुझाव दिए हैं। ऐसे सुझाव देने के पीछे उन्होंने धार्मिक सहनशीलता को कारण बताया।

जानकारी के मुता‎बिक मेनका ने हाल में हुई केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (सीएबीई) की 65वीं बैठक में यह सुझाव दिए। गौरतलब है ‎कि सीएबीई शिक्षा के क्षेत्र में निर्णय लेने वाली एक सर्वोच्च संस्था है. समय-समय पर इस संस्था द्वारा शिक्षा क्षेत्र में जरूरी बदलाव के लिए इस तरह की बैठकें आयोजित की जाती हैं।

बैठक के एक आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक मेनका गांधी ने नैतिक शिक्षा की कक्षाएं आयोजित करने और सभी धर्मों की किताबें पढ़ाने के सुझाव दिए, ताकि सभी छात्र अन्य धर्मों को अहिमयत देना और उनका सम्मान करना शुरू करें। सीएबीई की बैठक में मौजूद रहे ओड़िशा के शिक्षा मंत्री बद्री नारायण पात्रा ने पाठ्यक्रम में इस तरह सुधार करने का सुझाव दिया ताकि धार्मिक सहनशीलता और देशभक्ति की भावना को मजबूती मिल सके।

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