सिंधु कुमारी बोली : अतिथि देवो भव:
मुंबई: “अतिथि देवो भव” – यह प्राचीन भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र एक बार फिर साकार हुआ, जब मुंबई की एक रैपिडो बाइक राइडर सिंधु कुमारी ने रात 10 बजे कोलाबा बीच के पास रोती हुई एक विदेशी महिला पर्यटक को सुरक्षित उसके होटल तक पहुंचाया। यह घटना न सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, बल्कि लोगों के दिलों में भारत की मेहमाननवाजी और मानवता की नई इबारत लिख रही है।
दरअसल, एक विदेशी महिला पर्यटक बीच पर टहलते-टहलते बहुत दूर कोलाबा बीच तक पहुंच गई। वापसी में रास्ता भूल गई और उसका फोन नेटवर्कलेस हो गया, गूगल मैप्स भी काम नहीं कर रहा था। रात के 10 बजे वह अकेली, डरी हुई और रोती हुई सड़क पर खड़ी थी। तभी रैपिडो बाइकर सिंधु कुमारी वहां से गुजर रही थीं। महिला को रोते देख उन्होंने बाइक रोकी और पूछताछ की।

पर्यटक ने आंसुओं के बीच बताया कि वह होटल कोकोनट (Hotel Coconut) में ठहरी हुई है, लेकिन रास्ता नहीं मिल रहा। सिंधु कुमारी ने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अपनी बाइक पर बिठाया और सुरक्षित होटल तक छोड़ दिया। होटल पहुंचते ही महिला के चेहरे पर खुशी और मुस्कान लौट आई – वह अब सुरक्षित थी। सिंधु ने वीडियो में बताया, “मैंने देखा तो लगा कि मदद करनी चाहिए। रात का समय था, लेकिन इंसानियत तो 24 घंटे काम करती है।”
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है, जहां लोग सिंधु कुमारी की तारीफों के पुल बांध रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह असली भारत है – जहां लोग भी परिवार बन जाते हैं।” दूसरे ने कहा, “भारतीय नारी की शक्ति और दया देखकर गर्व हो रहा है।” कई लोगों ने इसे महिलाओं की सुरक्षा और मेहमाननवाजी का बेहतरीन उदाहरण बताया।
सिंधु कुमारी ने वीडियो में खुद को इंट्रोड्यूस करते हुए कहा कि वह इंस्टाग्राम पर @sindhukumari_rai पर हैं और लोगों से फॉलो करने की अपील की। उन्होंने पर्यटक को किराया लेने से भी इनकार कर दिया, बस इतना कहा – “इट्स ओके, मैं नहीं ले रही।”
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2010684796121559154
यह घटना बताती है कि तकनीक भले ही फेल हो जाए, लेकिन भारतीय संस्कृति में अतिथि सत्कार की भावना कभी फेल नहीं होती। रात के अंधेरे में एक अजनबी महिला की मदद करने वाली सिंधु कुमारी ने साबित कर दिया कि असली हीरो आम लोग ही होते हैं – जो बिना किसी उम्मीद के आगे आ जाते हैं।
अतिथि देवो भव – यह सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि सिंधु जैसी लाखों भारतीय महिलाओं का जीता-जागता सबूत है। (शगुन न्यूज़ इंडिया – https://shagunnewsindia.com/ सच्ची कहानियां, सच्ची भावनाएं)






