सोमवार को हम मिले…’ – किशोर दा के साथ एवरग्रीन मैजिक
मुंबई : हिंदी सिनेमा की ‘गोल्डन वॉइस’ सुलक्षणा पंडित अब हमारे बीच नहीं रहीं। 6 नवंबर को 71 साल की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया – वही तारीख जब 1985 में उनके पहले हीरो संजीव कुमार की मौत हुई थी। संगीतमय परिवार की इस बहुमुखी कलाकार की जिंदगी फिल्मी गानों जितनी मधुर तो थी ही, लेकिन निजी मोर्चे पर उतनी ही दर्दनाक। किशोर कुमार के साथ उनका हिट डुएट ‘सोमवार को हम मिले, मंगलवार को नैन’ आज भी दिलों पर राज करता है, लेकिन उनकी असल जिंदगी की दो प्रसिद्ध घटनाएं – संजीव कुमार के साथ अनकहा प्यार और उसके बाद की मानसिक त्रासदी – उन्हें बॉलीवुड की ‘अनलकी एक्ट्रेस’ बना गईं। आइए, उनकी इन यादों को ताजा करें।
पहली यादें: ‘सोमवार को हम मिले…’ किशोर दा के साथ अमर धुन
1977 की फिल्म अपनापन में सुलक्षणा ने जितेंद्र के साथ लीड रोल निभाया। लेकिन असल कमाल था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की संगीतबद्ध और आनंद बख्शी के बोल वाले डुएट ‘सोमवार को हम मिले, मंगलवार को नैन’ का। किशोर कुमार की मधुर आवाज में सुलक्षणा की कोकिला-सी सुलगाती धुन ने इसे एवरग्रीन बना दिया। गाना प्यार की मासूम शुरुआत को बयां करता है: सोमवार को हम मिले, मंगलवार को नैन मिले, बुधवार को मेरी नींद गई , जुमेरात को चैन ..। यह न सिर्फ चार्टबस्टर रहा, बल्कि सुलक्षणा की सिंगिंग टैलेंट को नई ऊंचाई दे गया। किशोर दा के साथ स्टेज शोज में भी यह डुएट फैंस का दिल जीतता था। आज, जब हम इसे सुनते हैं, तो सुलक्षणा की मुस्कान और उनकी जिंदादिली याद आती है – वह दौर जब वह 70 के दशक की लीडिंग प्लेबैक सिंगर थीं।

दूसरी यादें: संजीव कुमार के साथ मंदिर वाली ‘प्रपोजल’ टूटा दिल, अनकहा प्यार
सुलक्षणा की जिंदगी का सबसे चर्चित चैप्टर था उनका संजीव कुमार के साथ अफेयर। 1975 की डेब्यू फिल्म उलझन से ही संजीव उनके हीरो बने, और फिर चेहरे पे चेहरा, वक्त की दीवार जैसी फिल्मों में केमिस्ट्री कमाल की रही। लेकिन पर्दे के बाहर, सुलक्षणा का प्यार एकतरफा था। संजीव का दिल हेमा मालिनी पर अटका था, जो कभी पूरा न हुआ। बावजूद इसके, सुलक्षणा ने हिम्मत दिखाई एक दिन उन्होंने संजीव को मंदिर ले जाकर कहा, “मेरी मांग में सिंदूर भर दो!” लेकिन संजीव ने साफ मना कर दिया। उनकी बायोग्राफी के लेखक हनीफ जावेरी के मुताबिक, यह संजीव की जिंदगी का ‘वन-साइडेड’ मोमेंट था। सुलक्षणा कभी शादी न करने का फैसला ले लिया। यह घटना बॉलीवुड की सबसे दर्दभरी प्रेम कहानियों में शुमार हो गई ! जहां प्यार ने जिंदगी बदल दी, लेकिन खुशी न लाई।
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तीसरी यादें: संजीव की मौत के बाद ‘डिप्रेशन’ हिप ब्रेक और लाइफ से किनारा
6 नवंबर 1985 को संजीव कुमार की मौत ने सुलक्षणा को तोड़ दिया। सदमे में वह कमरे में बंद हो गईं, खाना-पीना छोड़ दिया। बहन विजेता पंडित ने बताया कि सुलक्षणा इतनी डिप्रेशन में चली गईं कि बाथरूम में फिसलकर हिप ब्रेक हो गया। सर्जरी हुई, लेकिन वह कभी पूरी तरह चल न सकीं। करियर भी ठप हो गया। इस बीच मां की मौत और काम की कमी ने उन्हें और तोड़ा। 2006 में बहन विजेता और जीजा आदेश श्रीवास्तव ने उन्हें घर लाकर संभाला। सुलक्षणा ने कभी शादी न करने का फैसला लिया, और आध्यात्मिकता में शांति तलाशी। आज, उनकी मौत उसी तारीख पर होना जैसे किस्मत का आखिरी कनेक्शन संजीव से।

सुलक्षणा पंडित: पंडित जसराज की भतीजी, जतिन-ललित की बहन ने 9 साल की उम्र से गाना शुरू किया, और 70-80 के दशक में 100 से ज्यादा गाने गाए। लेकिन उनकी जिंदगी सिखाती है: सफलता के पीछे कितना दर्द छिपा होता है। उनके भाई ललित पंडित ने कहा, “वह हमेशा संजीव को याद रखेंगी।” राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर उनकी विदाई एक ऐसी आवाज जो कैंसर जैसी बीमारियों से जूझती रही। उनकी यादें फिल्म जगत को हमेशा रोशन करती रहेंगी।






