दुआ करों, इन्हें तो नरक में भी जगह न मिले

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आदिल अहमद डार। यह उस आत्मघाती का नाम है जिसने हमारे 40 से ज्यादा जवानों की जान ले ली। इसका परिवार घटना स्थल से कोई 9 किलोमीटर दूर पुलवामा जिले के गुंडीबाग का रहने वाला है. डार 2017 में 12वीं की पढ़ाई छोड़कर एक मिल में काम करने लगा था. मिल में काम शुरू करने के एक साल बाद 19 मार्च 2018 को डार अपने दो दोस्तों तौसीफ और वसीम के साथ लापता हो गया. यह हाफ़िज़ था यानी जिसे क़ुरआन पूरी कंठस्थ याद थी।
परिवार ने डार की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई लेकिन कुछ दिनों बाद ही सोशल मीडिया पर एके-47 लिए हुए डार की तस्वीरें सामने आ गईं. बुरहानी बानी के मारे जाने के बाद यह प्रदर्शनों मेँ शामिल हुआ था और चोट भी खाई थी।
इसे आतंकी सरगनाओं ने कार चलाने से ले कर हथियार तक कि ट्रेनिंग दी।धर्म को अफीम बना कर चटवाया।
हमारा सिस्टम ऐसे लोगों की पहचान करने, इनकी गतिविधियों की निगरानी करने में असफल रहा है।
गुमशुदगी के बाद ही इसके गिरोह में शामिल होने की खबर थी। यह इलाके में ही रहता था। युवाओं को आशिक़ी न करने की सलाह देता था।
इसकी जान की तो कोई कीमत नहीं थी लेकिन यह हमारे जवानों को ले डूबा। इसे नरक में भी जगह न मिले।
– पंकज चतुर्वेदी की वॉल से

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