इरफान पठान ने लिया अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास

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नई दिल्ली, 06 जनवरी, 2020: क्रिकेट जगत के लिए एक बड़ी खबर है। 35 साल के ऑलराउंडर इरफान पठान ने शनिवार को क्रिकेट के सभी रूपों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। टीम इंडिया के प्रमुख स्विंग गेंदबाजों में शुमार रहे इरफान पठान विदेशों में फ्रेंचाइजी आधारित लीग के लिए उपलब्ध रह सकते हैं।


दोस्तों ने दी भावपूर्ण शुभकामनाएं:

दोस्त और एक भाई, जिसे मैं देख रहा हूं। पठान साब आपको पिच पर याद किया जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में आपके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। शुभकामनाएं- @सुरेश रैना


@गौतम गंभीर:
इतने सारे मैच जीतने वाले मंत्र, कई मैच जीतने वाली पारी, मेरे साथ खेले सभी सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक। आप एक सच्चे चैंपियन हैं, मेरा दोस्त। आपकी दूसरी पारी के लिए शुभकामनाएं। चियर्स


बता दें कि इरफान पठान अक्टूबर 2012 में आखिरी बार टीम इंडिया की जर्सी में उतरे थे, जब उन्होंने कोलंबो में टी20 वर्ल्ड कप के दौरान साउथ अफ्रीका के खिलाफ मैच खेला था। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में आखिरी बार फरवरी 2019 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में जम्मू-कश्मीर टीम का प्रतिनिधित्व किया। पठान ने पिछले महीने खुद को आईपीएल नीलामी पूल में भी नहीं रखा था। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज इरफान पठान ने 2003 में एडिलेड ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। कहा जाता है कि इरफान के पास गति नहीं थी, लेकिन गेंद को स्विंग करने की उनकी स्वाभाविक क्षमता ने उन्हें तुरंत सफलता दिलाई।

महान क्रिकटर कपिल देव के साथ उनकी तुलना भी की गई। तब ऐसा लग रहा था कि भारत ने उस ऑलराउंडर को ढूंढ़ लिया है, जो जगह कपिल के रिटायरमेंट के बाद से खाली थी। आखिरी बार अक्टूबर 2012 में भारत के लिए खेलने वाले पठान ने 29 टेस्ट (1105 रन और 100 विकेट), 120 वनडे (1544 रन और 173 विकेट) और 24 टी-20 अंतरराष्ट्रीय (172 रन और 28 विकेट) मैच खेले। इरफान पठान 2007 की टी-20 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा थे और पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में मैन ऑफ द मैच रहे थे। 2006 में पाकिस्तान के दौरे पर उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तब आया, जब वह हरभजन सिंह के बाद टेस्ट हैट्रिक लेने वाले दूसरे भारतीय बने।

उन्होंने कराची टेस्ट में सलमान बट, यूनिस खान और मोहम्मद यसफ को लगातार गेंदों पर आउट कर अपनी हैट्रिक पूरी की थी। इरफान पठान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ की उछाल वाली पिच पर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद अपने करियर के दौरान वह चोटों से परेशान रहे और उनका फॉर्म भी गिरता गया। गेंद को स्विंग करने की उनकी क्षमता भी बिगड़ गई।

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