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    Home»खेल»क्रिकेट

    क्या मीडिया और आलोचक धोनी को संन्यास दिला देना चाहते हैं ?

    By February 2, 2020Updated:February 2, 2020 क्रिकेट No Comments6 Mins Read
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    क्रिकेट की सनसनी महेंद्र सिंह धौनी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कुछ-कुछ दिनों बाद धौनी चर्चा में आ जाते हैं। भारतीय क्रिकेट प्रेमी उन्हें भुला नहीं पाते हैं। ऐसा लगता है कि जब भी किसी मैच में भारतीय टीम की हार होती है, तो धोनी पुरबइया हवा की टीस जैसा बन कर याद आने लगते हैं। हाल में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने वार्षिक अनुबंध की सूची जारी की, जिसमें धोनी का नाम नहीं है, जबकि वह पिछले वर्ष तक ए-ग्रेड में शामिल थे।

    बीसीसीआइ ने कहा कि धोनी पिछले छह महीने से क्रिकेट नहीं खेले हैं, जिसके कारण उन्हें अनुबंध में नहीं रखा गया है। मौजूदा नियम के तहत उसी खिलाड़ी को केंद्रीय अनुबंध दिया जा सकता है, जिसने कम-से-कम तीन टेस्ट या आठ वनडे मैच खेले हों। यदि धोनी इतने टी-20 मैच खेलते हैं, तो वह फिर से सूची में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने संन्यास को लेकर अभी तक खुद कुछ नहीं कहा है, लेकिन मीडिया का एक वर्ग उनके पीछे पड़ा है और उन्हें किसी भी तरह संन्यास दिला देना चाहता है।

    अनुबंध-सूची में नाम नहीं होने के बाद तो उनके संन्यास की खबरें चल पड़ी, जबकि बीसीसीआइ ने कहा है कि धौनी ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्व कप की टीम में जगह बनाते हैं, तो उन्हें अनुबंध दिया जा सकता है। भारतीय कोच रवि शास्त्री ने कहा कि यदि धौनी आइपीएल में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्वकप में उनके नाम पर विचार किया जा सकता है। इसके पहले एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में शास्त्री ने कहा था कि उन्हें लगता है कि अब धौनी उम्र के जिस पड़ाव में हैं, वे बस टी-20 फॉर्मेट खेलना जारी रखेंगे।

    अगर धोनी के योगदान की समीक्षा करें, तो पायेंगे कि उनका सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम का पूरा चरित्र बदल दिया है।

    इसके पहले भारतीय क्रिकेट टीम में केवल मुंबई और दिल्ली के खिलाड़ियों का बोलबाला था। झारखंड से निकले इस क्रिकेटर ने न केवल टीम का सफल नेतृत्व किया, बल्कि छोटी जगहों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए टीम में आने का रास्ता भी खोला। कपिल देव को छोड़ दें, तो इसके पहले टीम में ज्यादातर बड़े शहरों से आये अंग्रेजीदां खिलाड़ियों का ही बोलबाला रहा है। धौनी ने इस परंपरा को बदला और भारतीय क्रिकेट टीम को तीनों फॉर्मेट में सफल नेतृत्व भी प्रदान किया। इसमें दो राय नहीं है कि उन्होंने झारखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है।

    धौनी से ज्यादा समर्पित कोई खिलाडी नहीं है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। इसलिए संन्यास के निर्णय का अधिकार भी उनके पास होना चाहिए। इसमें कथित विशेषज्ञों को बेवजह अपनी टांग नहीं अडानी चाहिए। धौनी यं ही कैप्टन कल नहीं कहे जाते। एक ओर जहां इतनी अटकलें चल रही हैं. तो दसरी ओर धौनी बिंदास रांची की सड़कों पर घम रहे हैं। वह लगातार स्टेडियम जा रहे हैं और नेट पर अभ्यास कर रहे हैं। वह अपनी फिटनेस समेत बल्लेबाजी पर ध्यान दे रहे हैं। साथ ही, झारखंड रणजी टीम के क्रिकेटरों को टिप्स दे रहे हैं। वह टीम के अघोषित मेंटर की भूमिका में हैं।

    झारखंड रणजी टीम को लगातार दो मैचों में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में धौनी टीम को जीत का मंत्र भी दे रहे हैं। इससे उन्होंने आगामी आइपीएल के लिए खुद को तैयार रखने के संकेत भी दे दिये हैं। साथ ही चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक एन श्रीनिवासन ने उनके आइपीएल में खेलने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। श्रीनिवासन ने कहा है कि धौनी इस साल के आइपीएल में भी चेन्नई सुपर किंग्स की अगुआई करेंगे और अगले साल यानी 2021 में भी धौनी टीम का नेतृत्व करेंगे। धौनी शुरुआत से ही चेन्नई का हिस्सा रहे हैं और टीम पर बैन लगने के कारण दो साल तक उसका हिस्सा नहीं रहे थे। श्रीनिवासन ने कहा कि टीम उन्हें अगले साल रिटेन करेगी।

    यह सही है कि महेंद्र सिंह धौनी जुलाई, 2019 में इंग्लैंड में हुए विश्वकप में भारत की सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों हार के बाद से क्रिकेट मैदान से बाहर हैं। विश्वकप के सेमीफाइनल में हारने के बाद भारत ने वेस्टइंडीज़ का दौरा किया और उसके बाद घरेलू जमीन पर दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, वेस्टइंडीज, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मैच खेले हैं। ऑस्ट्रेलिया से मुकाबले के बाद न्यूजीलैंड के साथ टी-20 सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा हो चुकी है।

    धौनी को इन सभी सीरीज में भारतीय टीम में शामिल नहीं किया गया है, पर ऐसा भी नहीं है कि धौनी खाली बैठे हों। उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि मिली है और क्रिकेट से दो महीने का अवकाश लेकर उन्होंने टेरिटोरियल आर्मी के साथ जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी निभायी। लोकप्रियता के मामले में वह क्रिकेटर और बॉलीवुड स्टार से भी आगे हैं। जनवरी से नवंबर, 2019 तक एडएक्स इंडिया के रिसर्च में यह बातें सामने आयी है कि विज्ञापनों के मामले में धौनी कप्तान विराट कोहली से आगे हैं।

    वह इकलौते सेलेब्रिटी हैं, जिन्होंने इस मामले में बॉलीवुड सितारों को भी पीछे छोड़ दिया है। खबरों के अनुसार, धौनी अलग-अलग ब्रांड के 44 विज्ञापनों में दिख रहे हैं, जबकि विराट कोहली 43 विज्ञापनों में नजर आ रहे हैं।
    धौनी की आक्रामकता में भले ही कमी आ गयी हो, लेकिन उनकी लय आज भी बरकरार है। कप्तान के रूप में उनके प्रशंसकों की संख्या व्यापक है।

    इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन ने धौनी को सीमित ओवर का इस दौर का सर्वश्रेष्ठ कप्तान बताया है। उनका कहना था कि सीमित ओवरों के मैच में उन्होंने जितने कप्तान देखे हैं, धौनी सर्वश्रेष्ठ हैं। जिस तरह वह विकेट के पीछे से सभी खिलाड़ियों को प्रेरित करते हैं, नये-नये विचार लाते हैं, दबाव झेलते हैं, वह देखने योग्य है। कुछ समय पहले आइसीसी ने जब ट्वीट कर पूछा कि दुनिया में सबसे बेहतरीन विकेटकीपर कौन है, तो अधिकांश का जवाब थामहेंद्र सिंह धौनी। वह विकेट के पीछे से गेंदबाजों को कैसी और कहां गेंद करें, इसकी लगातार हिदायत देते रहते हैं।

    हालांकि विकेट का सारा श्रेय गेंदबाजों को मिलता है और हम अक्सर धौनी के योगदान की अनदेखी कर जाते हैं। कुछ समय पूर्व ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर शेन वॉटसन ने कहा था कि यह धौनी पर निर्भर करता है कि वह कब संन्यास का फैसला करते हैं, क्योंकि वह अब भी शानदार तरीके से खेल रहे हैं। वॉटसन ने कहा कि धौनी के पास कौशल की कोई कमी नहीं है। उनमें फुर्ती की कोई कमी नहीं है, वह विकेटों के बीच शानदार तरीके से दौड़ लगाते हैं और विकेटकीपिंग में भी लाजवाब हैं। यह फैसला उन्हें ही करना है, क्योंकि उन्हें पता है कि उनमें कितना क्रिकेट बचा हुआ है।

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