गोपाल जी महाराज
प्रकृति ने हम मनुष्य को ज्ञान एवं बुद्धि दी है, कल्पना शक्ति दी है यदि हम कहें कि कल्पना ही यथार्थ भी बनती है। इस दुनिया में सब कुछ का होना न होना संभव है जहाँ संभव है वहीं असंभव भी है लेकिन इन सभी के पीछे हमारा नजरिया कैसा है यह इस बात पर निर्भर करता है।, जहाँ नकारात्मकता है वहीं सकारात्मक भी है नकारात्मकता को सकरात्मकता में कैसे परिवर्तित किया जाए? सकारात्मक कल्पना जीवन को सुंदरतम से सुन्दर बना देती है। वहीं पर जो व्यक्ति सुंदरतम कल्पना को मन में धारण करने की चेष्टा ही नहीं करता या कर सकता है तो वह अच्छा जीवन कैसे जी सकता है। कल्पना वह सच्ची जादुई गलीचे के सामान है। जिस पर हम बैठ कर काम करने की चाहत बनाये रख सकते हैं। हमारे समकक्ष लोगों की सबसे बड़ी अनुभूति है कि है व्यक्ति अपना मानसिक नजरिया या दृष्टि बदलकर अपनी जिंदगी को बदल सकता है।
जीवन के अधिकांश भाग में ऐसे लोगे दिखाई देते हैं, जो कई बार तो ऐसी बातों से बहाना बनाया करते हैं कि परिस्थितियां उनके विल्कुल विपरित होने की वजह से वे अपने जीवन में बहुत बेहतर नहीं कर पाए अथवा जिस लक्ष्य को वे पाना चाहते थे उसको नहीं प्राप्त नहीं कर सके। दरअसल यह बात पूर्णतः सत्य नहीं है बल्कि इसके पीछे की सच्चाई यह है कि ऐसे लोगो ने इस द्रष्टि कोण से सोचा ही नहीं कि वे जीत सकते हैं। एक व्यक्ति अपने जीवन में अनेकों बाधाओं को पार करते हुए अपने दृष्टि कोण को मजबूत कर काम करते हुए पूरे विश्व के सामने एक पहचान बनाई। ऐसे भी लोगों का मानना है कि, ‘यदि आप ऐसा सोचते हैं कि आप किसी काम को कर सकते हैं ठीक इसके विपरीत यदि आप ऐसा सोचते हैं कि आप इस काम को नहीं कर सकते हैं, तो आप दोनों ही स्थितियों में सही हैं।’ ऐसा इसलिए, क्योंकि दोनों ही स्थितियां व्यक्ति के दृष्टि कोण से उसके मस्तिष्क में आविष्ट हो जाती हैं।







