…लेकिन जन्म के समय तो सब खाली हाथ आते हैं

0
674
साभार: गूगल

एक व्यापारी था। उसने व्यापार में खूब कमाई की बड़े-बड़े मकान बनाए, नौकर-चाकर रखे, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उसके दिन फिर गए व्यापार में घाटा आया और वह एक-एक पैसे के लिए मोहताज हो गया।

जब उसकी परेशानी सहन से बाहर हो गई, तब वह एक साधु के पास गया और रोते हुए बोला – महाराज, मुझे कोई रास्ता बताइए, जिससे मुझे शांति मिले।

साधु ने पूछा – तुम्हारा सब कुछ चला गया ?

व्यापारी ने कहा – जी हां।

साधु बोले – तुम्हारा था तो उसे तुम्हारे पास रहना चाहिए था! वह चला कैसे गया ?

व्यापारी चुप हो गया।

साधु — जन्म के समय तुम अपने साथ कितना धन लाए थे ?

व्यापारी — स्वामीजी, जन्म के समय तो सब खाली हाथ आते हैं।

साधु बोले – ठीक है, अब यह बताओ कि मरते समय अपने साथ कितना ले जाना चाहते हो ?

व्यापारी — मरते समय साथ कौन ले जाता है, जो मैं ले जाऊंगा।

साधु बोले – जब तुम खाली हाथ आए थे और खाली हाथ जाओगे तो फिर चिंता किस बात की करते हो ?

व्यापारी ने कहा – महाराज, जब तक मौत नहीं आती, तब तक मेरी और मेरे घर वालों की गुजर-बसर कैसे होगी ?

साधु हंस पड़े – जो धन के भरोसे रहेगा, उसका यही हाल होगा तुम्हारे हाथ-पैर तो हैं, उन्हें काम में लाओ पुरुषार्थ सबसे बड़ा धन है ईश्वर पर भरोसा रखो शांति का यही एक मात्र रास्ता है।

व्यापारी की आंखें खुल गईं उसका मन शांत हो गया जाने कितने वर्षों के बाद पहली बार रात को उसे चैन की नींद आई और उसके शेष वर्ष बड़े आनंद में बीते।

श्रीमद्भागवत गीता का यही सार है ! कर्म करो और परमात्मा में निष्ठा रखो यह शांति व सुखमय जीवन का सबसे सुगम मार्ग है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here