जिसने की शिव भक्ति, उसका बेड़ा पार हुआ

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सावन में बन रहे हैं विशेष योग

सावन के पहले ही दिन भगवान् की कृपा सुबह सुबह जमकर बरसी, ब्रम्हकाल मुहर्रत में काले- काले बादलों ने जब डेरा डाला तो ठंडी हवाओं ने भी खूबसूरत समां बाँधा, फिर इसके बाद जमकर पानी बरसा जो देर शाम तक रुक रुक कर जारी रहा। सोमवार की शुरुआत इस तरह हो जाएगी, इसका अंदाजा किसी को न था, क्योंकि पिछले कई दिनों से लोग भीषण गर्मी झेल रहे थे।

ज्तोतिषचार्य के अनुसार इस साल सावन के महीने कई विशेष योग बन रहे हैं। सावन का महीना 6 जुलाई को सोमवार यानी भोले शंकर के दिन से शुरू हो रहा है। सावन के महीने की समाप्ति भी सोमवार के दिन से ही हो रही है। हिंदु पंचांग के अनुसार पांचवां महीना श्रावण का होता है।

यह संसार अब भगवान शिव ही संभालेंगे। सावन के महीने में भगवान शिव और विष्णु की आराधना बहुत फलदाई मानी जाती है। पूरे श्रावण मास में सोमवार 06, 13, 20, 27 जुलाई और 03 अगस्त को है। सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन से सभी तरह की परेशानियों से छुटकारा मिलता है। इस महीने लोग अपनी पसंद की चीज का एक महीने के लिए त्याग करते हैं। सावन के महीने के आखिर में रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है।

व्रत का महत्वः

कहा जाता है कि श्रावण माह भगवान शिव को बहत ही प्रिय होता है। स्कंद पुराण की एक कथा के अनुसार सनत कुमार भगवान शिव से पूछते हैं कि आपको सावन माह क्यों प्रिय है। तब भोलेनाथ बताते हैं कि देवी सती ने हर जन्म में भगवान शिव को पति रूप में पाने का प्रण लिया था पिता के खिलाफ होकर उन्होंने शिव से विवाह किया लेकिन अपने पिता द्वारा शिव को अपमानित करने पर उसने शरीर त्याग दिया। उसके पश्चात माता सती ने हिमालय व नैना पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया। इस जन्म में भी शिव से विवाह हेतु इन्होंने श्रावण माह में निराहार रहते हुए कठोर व्रत से भगवान शिवशंकर को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया। इसलिए श्रावण माह से ही भगवान शिव की कृपा के लिए सोलह सोमवार के उपवास आरंभ किए जाते हैं।

सावन सोमवार व्रत के लाभ:

भगवान शिव की पूजा के लिए और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से सावन सोमवार व्रत रखे जाते हैं। अगर विवाह में अड़चनें आ रही हों तो संकल्प लेकर सावन के सोमवार का व्रत किया जाना चाहिए। आयु या स्वास्थ्य बाधा हो तब भी सावन के सोमवार का व्रत श्रेष्ठ परिणाम देता है।16 सोमवार व्रत का संकल्प सावन में लेना सबसे उत्तम माना गया है। सावन महीने में मुख्य रूप से शिव लिंग की पूजा होती है और उस पर जल तथा बेल पत्र अर्पित किया जाता है।

पूजा में इन बातों का रखें ध्यानः

भगवान शिवजी की पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे भगवान शिव नाराज हो जाते हैं। तुलसी का भी प्रयोग भगवान शिवजी की पूजा में नहीं किया जाता है। शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी भी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।

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