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लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में श्वेता को मिले 4 स्वर्ण पदक व एक नगद पुरस्कार
लखनऊ 09 दिसम्बर। हौसले कभी भी हालात की परवाह नहीं करते। आगे बढ़ने का जज्बा हो तो पथरीले पथ पर भी कदम बढ़ाते हुए पथिक मंजिल हासिल कर ही लेता है। लखनऊ विश्व विद्यालय के दीक्षांत समारोह में आज चार स्वर्ण पदक व एक नगद पुरस्कार पाने वाली एम. ए. संस्कृत की मेधावी छात्रा श्वेता गुप्ता ने ऐसा ही कर दिखाया है।
मोहनलालगंज के गरीब किसान घर की बेटी श्वेता गुप्ता के संघर्ष और सफलता की कहानी उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरक व अनुकरणीय हैं
जो गरीबी व संसाधनों के अभाव में कठिन परिश्रम कर ना केवल अपनी पढाई का प्रबंध करते हैं बल्कि परिवार का भी भरण-पोषण करते हैं।
श्वेता का निजी जीवन दुश्वारियों से भरा है। गरीबी से जुझते परिवार में पिता का सहारा बनने को स्नातक की पढाई बीच में ही छोड़ उसने निजी संस्थानों में कंप्यूटर टाइपिंग की नौकरी की। दो छोटे भाई और एक छोटी बहन की पढाई का प्रबंध करते हुए उसने बीते दो बरस पहले अपनी छूटी हुई आगे की पढाई फिर से शुरू की। श्वेता ने संस्कृत विषय से एम. ए. में दाखिला लिया। एक तरफ पढाई की धुन तो दूसरी तरफ उसकी निजी जिंदगी एक के बाद एक इम्तिहान ले रही थी। ह्रदयाघात से पिता चल बसे। अब तो पूरा घर उसी पर आश्रित हो गया। शोकाकुल परिवार और खुद को कुछ उबार पाती कि इससे पहले पिता की मौत में मां बेहोश होकर गिरी जिससे उसकी कमर की कई हड्डियाँ टूट गई। अब तो उसकी जिम्मेदारी और भी जटिल है गई।
इन विकट परिस्थितियों में श्वेता लक्ष्य से डिगी नहीं। लखनऊ विश्व विद्यालय एम. ए. संस्कृत में उसने चारों सेमेस्टर में विश्वविद्यालय टॉप किया। सफलता का कारवां यही नहीं थमा बल्कि “नेट” परीक्षा में भी सफलता हासिल की। श्वेता को वर्ष 2017 में एम. ए. 1st to 4th सेमेस्टर में 83. 36% अंक हासिल कर संस्कृत की श्रेष्ठ छात्रा होने के लिए कु. विमला पुरी स्वर्ण पदक, एम. ए. प्रथम व एम. ए. फाइनल में संयुक्त रूप से सर्वाधिक प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए श्रीमती चंद्रादेवी एवं श्री राधाकृष्ण अरुणवंशी स्वर्ण पदक, एम. ए. द्वितीय में वैदिक ग्रुप परीक्षा में सर्वाधिक अंक पाने के लिए श्रीमती चंद्रकली पांडेय स्मृति स्वर्ण पदक एवं एम. ए. में सभी सेमेस्टर में छात्रा के रूप में सर्वाधिक अंक प्रतिशत के लिए श्रीमती इंद्राणी देवी स्मृति नगद पुरस्कार से आज सम्मानित किया गया।
राजा सर हरनाम सिंह, सर Harcourt butler gold medal। ये चौथा गोल्ड मेडल दिया गया।
श्वेता की इस असाधारण प्रतिभा और कीर्त पर हम सब को नाज है। शाबाश श्वेता आप सच्चे अर्थो में महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल हैं। आप पर देश गर्व कर रहा है।
संघर्षों से सुनहरे शिखर तक श्वेता

4 स्वर्ण मैडल व एक नगद पुरस्कार पाने वाली मोहनलालगंज की एक गरीब किसान परिवार के घर की लड़की श्वेता गुप्ता पर आज पूरे लखनऊ को नाज है, पर उसके संघर्ष की कहानी में दुःखों का पहाड़ है- पिता के कंधों का बोझ कम करने के लिये स्नातक की पढ़ाई बीच में छोड़कर प्राइवेट संस्थानों में कम्प्यूटर टाईपिंग का काम शुरू किया, दो छोटे भाईयों व एक छोटी बहन को पढ़ाने के बाद पिछले दो वर्षों से फिर उसने आगे की पढाई शुरू की, फिर एमए में भी एडमिशन ले लिया विषय संस्कृत रखा।
इसी दौरान पिताजी की हार्टअटैक से मौत हो गई और इस सदमें से माँ बेहोश कर गिरीं उनकी कमर की कई हड्डियां टूट गईं, पारिवारिक बोझ और समय की इस निर्दयी मार को सहन करते हुए उसने चारों सेमेस्टर में युनिर्वसिटी टाप किया साथ ही नेट का एक्जाम भी क्वालीफाई किया। पर वह शायद इसलिये खुश नहीं कि उसकी खुशी में खुश होने वाले उसके पिता उसके साथ नहीं हैं और माँ की हालत भी खास सही नहीं है।