सौभाग्या योजना में गरीब विद्युत उपभोक्ताओ के लिए सरकार को लाना होगा सस्ती टैरिफ
उत्तर प्रदेश में समय से बिजली बिल का भुगतान करने वाले विद्युत उपभोक्ताओ की संख्या में बिना बढ़ोतरी किए ऊर्जा क्षेत्र में सुधार होना मुश्किल है। आज प्रदेश में 3 करोड़ उपभोक्ता है जिसमें केवल ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के घरेलु उपभोक्ताओ की संख्या लगभग 2 करोड़ 15 लाख के करीब है। ऐसे में उपभोक्ता परिषद ने जब एक अध्ययन किया तो पाया की प्रदेश में मंहगी बिजली ने लोगों की कमर तोड़ दी है। लोग चाहकर भी भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। दूसरा कारण समय से भुगतान करने वालो को बढ़ावा न मिलना। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि यदि सरकार इस दिशा में विचार करे अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं।
अपने शोध में उपभोक्ता परिषद ने पाया की सौभाग्या योजना में लाखों विद्युत उपभोक्ताओ ने बिजली संयोजन लेते वक्त यह सोचा की उन्हे फ्री में संयोजन मिल रहा है तो फ्री में बिजली भी मिलेगी लेकिन अब जब भुगतान करने का समय आया तो ऐसे गरीब उपभोक्ताओ की व्यथा यह है कि उनकी माली हालत ठीक नहीं ऐसे में इन बीपीएल उपभोक्ताओ के लिए सस्ती बिजली दर का नया स्लैब लाना बहुत जरूरी ।
ओटीएस लाना अच्छी बात लेकिन…..
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि एक दूसरा कारण यह भी समझ में आया कि जो विद्युत उपभोक्ता समय से बिल जमा करते हैं उनकी लिए रिबेट 1 प्रतिशत है वह बहुत कम है एक समय था आज के 20 वर्ष पहले जब सरकार वर्ष 1999 में बिजली दर घोषित करती थे तो उस समय घरेलु उपभोक्ताओ के लिए समय से बिजली बिल का भुगतान करने पर रिबेट 10 पैसा प्रति यूनिट और उस समय ग्रामीण विद्युत उपभोक्ता जिनके घर मीटर नहीं लगा था उनसे रुपया 52 प्रति संयोजन प्रति माह वसूल होता था अगर उपभोक्ता समय से भुगतान करता था तो उसे रुपया 2 की छूट यानी 50 लिया जाता था आज समय से बिल जमा करने वाले विद्युत उपभोक्ताओ का रिबेट कम होता जा रहा और वही दूसरी तरफ हम जो उपभोक्ता बकायेदार है उनकी लिए ओटीएस लाते है ओटीएस लाना अच्छी बात लेकिन समय से भुगतान करने वाले विद्युत उपभोक्ताओ को भी ज्यादा से ज्यादा सुविधा और रिबेट देना बहुत जरूरी है जिससे ऐसे उपभोक्ताओ का मनोबल न टूटे जो समय से भुगतान करते है।
समय से भुगतान करने वालो का मनोबल बढ़ाना:
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा आज सौभाग्या की बात करें तो एक बहुत बड़ा मामला सामने आया, 1 अप्रैल 2017 के बाद लेजरीकृत एक बार भी न भुगतान करने वाले कुल लगभग 22 लाख 51 हजार उपभोक्ता है। निश्चित ही इसमें ज्यादातर गरीब उपभोक्ता है जिनकी माली हालत ठीक नहीं है, वही दूसरी ओर पावर कार्पोरेशन ने जो ओटीएस पंजीकरण का लक्ष्य रखा है वह लगभग 63 लाख 35 हजार है यानि इतनी बड़ी संख्या में घरेलु व किसानों की बकायेदारी होगी ऐसे में अब यह सोचना बहुत जरूरी है की महंगी बिजली दर को सस्ती करना समय से भुगतान करने वालो का मनोबल बढ़ाना बिजली निगमों को बचने का एक सरल उपाय है।







