उपभोक्ता परिषद ने कहा जिस प्रकार से कॉल सेंटर के मामले में फोन रिस्पॉन्स न करने पर रुपए 50 प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा का है नियम इस प्रकार से अवर अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता डिस्कॉम एमडी तक सरकारी सीयूजी नंबर ना उठाने पर रुपया 50 प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा की मांग हेतु रखेंगे प्रस्ताव
लखनऊ, 01 जून : उपभोक्ता परिषद ने कहा 1912 पर शिकायतों के फर्जी निस्तारण में मुख्य भूमिका अवर अभियंता और संबंधित अभियंताओं द्वारा बिना शिकायत का निस्तारण किए निस्तारण व शिकायत को क्लोज कर 1912 को संदर्भित करने से उपभोक्ताओं को मिलता है ऑटो जेनरेटेड मैसेज जो गलत ओटीपी व्यवस्था हो लागू
उत्तर प्रदेश में अनेकों जनपदों में बिजली की उपलब्धता होते हुए भी उसका वितरण सफलतापूर्वक न किए जाने का मुख्य कारण विद्युत व्यवधान व ब्रेकडाउन है अनेकों खंडो में पूरे प्रदेश में देखने को मिला की विद्युत व्यवधान जब कई घंटे तक चला तो उपभोक्ता सब स्टेशनों तक पहुंच गए कहीं-कहीं धरना प्रदर्शन भी करने लगे इसको लेकर उपभोक्ता परिषद ने बहुत गहनता से जब छानबीन की तो सामने आया कि ज्यादातर उन खंडो में इस प्रकार की घटनाएं घटित हुई जहां पर निचले स्तर के अभियंताओं ने फोन उठाना बंद कर दिया।
वही अधिशासी अभियंता और उसके ऊपर के अभियंताओं ने उपभोक्ताओं के फोन पर 90 प्रतिसत रिस्पांस किया लेकिन उपखंड अधिकारी व अवर अभियंता जिन इलाकों में ब्रेकडाउन के चलते उपभोक्ता आक्रोशित हुए और सडकों पर उतरे में सजकता से उपभोक्ताओं को सही स्थिति की जानकारी देना था उनके स्तर पर अनेकों विद्युत वितरण खंडो में उदासीनता बरती गई अभियंताओं ने फोन उठाना बंद कर दिया उपभोक्ता परिषद ने जब 1912 पर फर्जी निस्तारण के मामले में छानबीन की तो पता चला कि अवर अभियंता विद्युत समश्या को बिना ठीक किया ही जब शिकायत को क्लोज करके 1912 को संदर्भित कर देते हैं तो स्वत फर्जी निस्तारण का एसएमएस उपभोक्ता को जनरेट हो जाता है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा उत्तर प्रदेश में मुआवजा कानून को शक्ति से न लागू किए जाने का नतीजा है इस प्रकार की घटनाएं घटित हो रही है कॉल सेंटर द्वारा फोन ना उठाए जाने पर भी प्रत्येक मामले में रुपया 50 प्रतिदिन के हिसाब से उपभोक्ता को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।उपभोक्ता परिषद इस व्यवस्था में संशोधन के लिए जल्द ही विद्युत नियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल करेगी और बिजली आवश्यक सेवाओं का अंग है ऐसे में अवर अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता डिस्कॉम एमडी तक सरकारी नंबर 10 से 5 के बीच ऑफिस टाइम में फोन ना उठाने के मामले में मुआवजा की मांग रखेगा। उपभोक्ता परिषद इस पूरी व्यवस्था को कंप्यूटराइज करने की मांग करता है और साथ ही बिना ओटीपी के शिकायतों को क्लोज ना किया जाए इस व्यवस्था को शक्ति से लागू करने की मांग करता है उपभोक्ताओं का भार बढाने के लिए उपभोक्ता के मोबाइल पर नोटिस तक भेज दी जाती है और जब उपभोक्ता की शिकायत का निस्तारण करने के लिए ओटीपी व्यवस्था की मांग की जाती है तो बिजली कंपनियों के हाथ पांव फूल जाते हैं ऐसा दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।







