आर्गेनिक व रासायनिक के उपयोग से आएगी कम लागत, मिट्टी भी रहेगी स्वस्थ
लखनऊ, 28 जुलाई 2021: रासायनिक खाद के अवैज्ञानिक तरीके से किये जा रहे प्रयोग ने मिट्टी को अधमरा कर दिया है। खेत की उर्वरा शक्ति दिन ब दिन क्षीण होती जा रही है। अब सवाल उठ रहा है कि किसान यदि आर्गेनिक खेती की तरफ बढ़े तो उपज कम हो जाएगी और रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहा है तो खेत की उर्वरा शक्ति ही कम हो रही है। अब समस्या पैदा हो रही है कि किसान करे क्या? इसका एक मात्र उपाय है एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अर्थात न तो शुद्ध रूप से आर्गेनिक हो और न ही शुद्ध रूप से रासायनिक खाद का प्रयोग।
इन तीनों तरह की खेती के फायदे और नुकसान पर विचार करें तो आर्गेनिक खेती से अन्न व सब्जियां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक पौष्टिकता से भरपूर और ज्यादा समय तक टिकने की क्षमता तो रखेगी लेकिन उपज कम हो जाएगी। यही कारण है कि आर्गेनिक अन्न बाजार में महंगा मिल रहा है, लेकिन किसानों को इसके लिए बाजार तलाशना कठिन है। कुछ बिरले किसान हैं, जो आर्गेनिक खेती कर प्रचार-प्रसार खुद के यहां उपभोक्ताओं को आने के लिए आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं गाजीपुर जिले में करीमुद्दीनपुर गांव के पंकज राय, जिन्होंने आर्गेनिक खेती शुरू की और प्रचार प्रसार के बल पर अपने यहां ही उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रहे हैं। उनके यहां खुद स्वास्थ्य वर्धक खान-पान पसंद करने वाले एक गोभी के लिए भी आ जाते हैं।
दूसरी तरफ रासायनिक खाद के बल पर की जाने वाली खेती है, जिसका फायदा है कि उत्पादन बढ़ जाता है लेकिन मानव और मिट्टी दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि बिना वैज्ञानिक सलाह के किसान अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि सब्जी में कीड़ा या अन्य रोग लगे हैं तो किसान सीधे कृषि दुकानदार के पास जाता है और कहता है कि कीड़ा लगा है, दवा दे दो। वह एक मूल दवा को देने के साथ चार अन्य तरह की दवाएं भी यह कहते हुए कि साथ में इसे छिटकने पर ग्रोथ बढ़ जाएगा, अच्छा उत्पादन होगा आदि-आदि। किसान अनभिज्ञता के कारण सब ले लेता है।

आधुनिक खेती करने वालों में भी मात्र दो प्रतिशत किसान ही जानते हैं दवाओं का नाम
आधुनिक ढंग से खेती करने वालों में भी कुछ ही किसान हैं, जो यह जानते हैं कि हमारे लिए कब कौन सी दवा उपयुक्त होगी। प्रगतिशील किसान राजेश मिश्रा का कहना है कि आधुनिक खेती करने वाले लोगों में मात्र दो प्रतिशत किसान हैं, जो दवाओं का नाम जानते हैं, वरना अधिकांश लोग दुकानदार के बताए अनुसार ही दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। दुकानदार भी किसी तरह की खेती की विशेषज्ञता हासिल नहीं किये रहते हैं। इस कारण वे भी जो कम्पनियों के एजेंट बताते हैं, उसी के अनुसार वे किसान को बता देते हैं।
रासायनिक व आर्गेनिक के बीच का रास्ता फायदेमंद
तीसरी और सबसे उपयुक्त खेती करने का तरीका है एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन। इस तरह का प्रबंधन करने वाले एक प्रतिशत भी किसान नहीं मिलेंगे। हालांकि अब कृषि वैज्ञानिक इस पर विशेष बल दे रहे हैं और इसकी ओर किसानों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह की खेती करने से किसानों की लागत भी कम होगी, उत्पादन में वृद्धि के साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी बरकार रहेगी। इस तरह की खेती का मतलब है, गोबर की खाद, आयुर्वेदिक दवाओं के साथ ही सीमित मात्रा में उर्वरक खाद का भी प्रयोग करते रहना।
विशेषज्ञ ने कहा, खाद के प्रयोग का अवैज्ञानिक तरीका है गलत
इस सम्बंध में चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के प्रोफेसर मुनीष कुमार बताते हैं कि रासायनिक खाद का प्रयोग करना गलत नहीं है, लेकिन अवैज्ञानिक तरीके से प्रयोग करने से जमीन की उर्वरा शक्ति का ह्वास हो रहा है। अवैज्ञानिक तरीका वैसे ही है, जैसे हम बिना डाॅक्टर की सलाह के दवाओं का ओवर डोज ले लेते हें और उसका साइड इफेक्ट झेलते रहते हैं।
एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन से कम लागत में अधिक लाभ
भूमि संरक्षण और जल प्रबंधन में स्पेशलाइजेशन रखने वाले प्रो. मुनीष बताते हैं कि यदि हम एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन करते हैं तो उससे कम लागत में अधिक उपज ले सकते हैं। इसके साथ ही हम अपने खेत की सेहत को भी ठीक बनाये रख सकते हैं। यदि खेत की इम्यूनिटी बनी रहेगी तो हर वर्ष पैदावार अच्छा होता रहेगी।







