फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहे 382 शिक्षक होंगे बर्खास्त, यूपी एटीएस की जांच में निकले सबसे ज्यादा फर्जी शिक्षक देवरिया के
लखनऊ, 11 जनवरी: दूसरों का हक़ मार कर नौकरी पाना कितना आसान है यह इन जालसाजों से सीखिए इन्हें न तो अपने अंदर की अंतर आत्मा झकझोरती है और न ही अपने ज़मीर की आवाज सुनाई देती है इन्हें तो बस सुनहरे भविष्य की मंज़िल दिखाई देती है जिसपर चलना है चाहे वो जितना भी गलत रास्ता क्यों न हो? लेकिन जब फंसते हैं तो कहीं के मुंह दिखने लायक नहीं रह जाते हैं।
कुछ ऐसा ही मामला सामने आया हैं जिसमें फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले प्रदेश के 382 शिक्षकों को जल्द बर्खास्त किया जा सकता है। यूपी एसटीएफ ने जांच के बाद दोषी पाए गए शिक्षकों को बर्खास्त करने के लिए 48 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है। इन सभी की जांच बीते करीब साढ़े तीन वर्षों के दौरान की गयी है।
जालसाज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार 2006 से 2016 तक हुए भर्ती
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एसटीएफ के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये भर्तियां वर्ष 2006 से 2016 के बीच हुई थी। एसटीएफ और जिला पुलिस की जांच के बाद देवरिया में बीते दिनों 85 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। अब एसटीएफ मुख्यालय यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि किस तरह जालसाजों ने सरकारी सिस्टम को धता बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल की थी। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग के डाटाबेस की गहनता से पड़ताल जारी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बता दें कि एसटीएफ बीते करीब पांच वर्ष से फर्जी दस्तावेज लगाकर शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले की जांच कर रही है। एसटीएफ अनुमान के मुताबिक प्रदेश में इस तरह के करीब 50 हजार शिक्षक हैं, जिन्होंने दूसरे की मार्कशीट लगाकर नौकरी हासिल की और सालों से काम कर रहे हैं। हाल ही में एसटीएफ ने ऐसे 382 शिक्षकों के खिलाफ जांच पूरी कर उनको बर्खास्त करने की संस्तुति की है। इनमें सर्वाधिक 52 शिक्षक देवरिया के हैं। इसके अलावा मथुरा के 43, सिद्धार्थनगर के 29 शिक्षक हैं। बाकी जिलों के शिक्षकों की सूची जल्द अपडेट हो जाएगी।







