जैसलमेर, राजस्थान: 24 मई 2025 की रात को जैसलमेर के लाठी थाना क्षेत्र में एक भीषण सड़क हादसे ने पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों को गहरा झटका दिया। एक बोलेरो और ट्रक की टक्कर में चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में प्रसिद्ध वन्यजीव रक्षक राधेश्याम बिश्नोई (पेमाणी), श्याम बिश्नोई, कंवराज सिंह भाटी, और वन विभाग के कार्मिक सुरेंद्र चौधरी शामिल हैं।
हादसा उस समय हुआ जब राधेश्याम बिश्नोई को सूचना मिली थी कि एक हिरण का शिकार हो रहा है। हमेशा की तरह, वन्यजीवों के प्रति अपने समर्पण के साथ, राधेश्याम अपनी टीम के साथ रात में ही जंगल की ओर निकल पड़े। लेकिन रास्ते में उनकी बोलेरो एक ट्रक से टकरा गई, जिससे यह दुखद घटना घटी।
राधेश्याम बिश्नोई एक प्रख्यात पर्यावरण प्रेमी थे, जिन्होंने अपनी जिंदगी में 1,000 से अधिक हिरणों को शिकारियों से बचाया था। उनकी मृत्यु को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर लोग उनके योगदान को याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। @BishnoiYouth ने राजस्थान सरकार से राधेश्याम को शहीद का दर्जा देने और उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करने की मांग की है। स्थानीय प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। इस दुखद घटना ने जैसलमेर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में शोक की लहर पैदा कर दी है।
कौन थे राधेश्याम बिश्नोई
राधेश्याम बिश्नोई (पेमाणी) राजस्थान के जैसलमेर जिले के धोलिया गांव के एक प्रख्यात पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमी थे। वे बिश्नोई समुदाय से थे, जो पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपनी गहरी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। राधेश्याम को “वन्यजीवों का दोस्त” और “गोडावण मैन ऑफ इंडिया” के रूप में भी जाना जाता था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय वन्यजीवों, विशेषकर हिरणों (जैसे चिंकारा और काला हिरण) और पक्षियों के संरक्षण के लिए समर्पित किया।
उल्लेखनीय कार्य:
- वन्यजीव संरक्षण: राधेश्याम ने अपने जीवन में 1,000 से अधिक हिरणों को शिकारियों से बचाया। वे रात-दिन जंगल में पेट्रोलिंग करते और शिकारियों को पकड़ने में मदद करते थे। उनकी सक्रियता से कई शिकारी जेल पहुंचे।
- जंगल में पानी की व्यवस्था: गर्मियों में जब जंगल में पानी की कमी होती थी, राधेश्याम ने अपने प्रयासों से धोलिया, खेतोलाई और गंगा राम की ढाणी से लगते जंगलों में 100 से अधिक वाटर हॉल बनाए। इनमें ट्रैक्टरों से पानी भरकर चिंकारा, हिरण और अन्य वन्यजीवों की प्यास बुझाई जाती थी।
- संगठनात्मक भूमिका: वे अखिल भारतीय बिश्नोई सभा के जैसलमेर जिलाध्यक्ष थे और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर तालाबों और जलस्रोतों में पानी की व्यवस्था करते थे ताकि वन्यजीवों को भटकना न पड़े।
- पर्यावरण जागरूकता: राधेश्याम ने न केवल वन्यजीवों की रक्षा की, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए भी काम किया। उनकी सक्रियता ने जैसलमेर के लाठी क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए सुरक्षित माहौल बनाया।
निधन: 24 मई 2025 की रात को जैसलमेर के लाठी क्षेत्र में एक सड़क हादसे में राधेश्याम बिश्नोई और उनकी टीम के तीन अन्य सदस्यों (श्याम बिश्नोई, कंवराज सिंह भाटी, और सुरेंद्र चौधरी) की मृत्यु हो गई। वे एक हिरण के शिकार की सूचना पर जंगल की ओर जा रहे थे।







