ग्रीनलैंड विवाद बढ़ा: “नो गोइंग बैक” का ऐलान, यूरोप ने थ्रेट्स को किया खारिज
वॉशिंगटन/कोपेनहेगन, 20 जनवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपना रुख और सख्त कर दिया है। उन्होंने कहा है कि “नो गोइंग बैक” – ग्रीनलैंड पर पूरा नियंत्रण अमेरिका को चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। ट्रंप ने डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ की धमकी दी है उन्होंने कहा कि फरवरी से 10% और जून तक 25% तक टैरिफ लगाएंगे, जब तक “कम्पलीट एंड टोटल खरीद” नहीं हो जाती। ट्रंप ने डावोस समिट में यूरोपीय लीडर्स को चेतावनी दी कि दुनिया सुरक्षित नहीं रहेगी बिना ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण के।
डेनमार्क ने ट्रंप की धमकियों के जवाब में ग्रीनलैंड में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं। रॉयल डेनिश आर्मी के चीफ और दर्जनों सैनिक पहुंच चुके हैं, जो NATO सहयोगियों के साथ “आर्कटिक एंड्योरेंस” एक्सरसाइज में शामिल होंगे। ग्रीनलैंड के पीएम ने कहा कि मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल “असंभव नहीं” लेकिन बहुत कम संभावना है, और क्षेत्र “ग्रीनलैंड ही रहेगा”।

यूरोपीय देशों ने ट्रंप की “ब्लैकमेलिंग” को सिरे से खारिज कर दिया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने “रूल ऑफ लॉ” पर जोर दिया, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने “वर्ल्ड ऑर्डर में रप्चर” की चेतावनी दी। EU अधिकारी ने इसे “गलती” बताया और “ट्रेड बाजूका” जैसे जवाबी कदमों पर विचार किया जा रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर AI इमेज और मॉकिंग पोस्ट शेयर कर यूरोप को चिढ़ाया।
उधर, ईरान ने ट्रंप के हमले की धमकियों पर सख्त चेतावनी दी और कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो “पूर्ण युद्ध” होगा। ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर ट्रंप ने पहले “हेल्प इज ऑन इट्स वे” कहा था, लेकिन अब उन्होंने हमले के विकल्पों पर विचार किया और फिलहाल पीछे हटे।
हम गुंडागर्दी की बजाय सम्मान और क्रूरता की बजाय कानून के शासन को चुनते हैं : मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा जवाब देते हुए कहा कि हम गुंडागर्दी की बजाय सम्मान, धन-पूजा की बजाय विज्ञान और क्रूरता की बजाय कानून के शासन को चुनते हैं। उन्होंने कहा कि यूरोप में अभी भी कानून और भविष्य की निश्चितता (predictability) को महत्व दिया जाता है, और बाजार ने इसकी असली कीमत अभी पूरी तरह नहीं समझी है। ग्रीनलैंड मुद्दे को लेकर अब यह विवाद धीरे-धीरे यूरोप बनाम ट्रंप की ओर बढ़ता दिख रहा है।
गाजा पीस बोर्ड में भारत शामिल: ट्रंप ने “Board of Peace” बनाया है, जो पहले गाजा पर फोकस करेगा और बाद में अन्य संघर्षों पर। भारत समेत कई देशों को न्योता मिला है। पाकिस्तान ने भी पुष्टि की कि उसे पत्र मिला। लेकिन इजरायल नाराज है – तुर्की और कतर की भूमिका पर आपत्ति जताई, कहा कि उनका एग्जीक्यूटिव बोर्ड में होना नीति के खिलाफ है। तुर्की और कतर गाजा में प्रभावशाली हैं, लेकिन इजरायल ने सैनिकों की मौजूदगी को खारिज किया।
ट्रंप का ग्रीनलैंड प्लान NATO को चुनौती दे रहा है, जबकि गाजा बोर्ड UN की जगह ले सकता है। यूरोप और मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है – क्या यह डिप्लोमेसी होगी या बड़ा टकराव? स्थिति पर सभी की नजर टिकी है।






