पुरानी चीजों को कला में बदलकर पर्यावरण बचाने का अनोखा संदेश दे रही है ललित कला अकादेमी, क्षेत्रीय केंद्र
लखनऊ। संस्कृति मंत्रालय के स्वच्छता एक्शन प्लान के तहत 22 से 24 दिसंबर 2025 तक चल रही इस तीन दिवसीय ‘वेस्ट मटेरियल वर्कशॉप’ में कलाकार और छात्र बेकार समझे जाने वाले सामान से शानदार कलाकृतियां रच रहे हैं।
दूसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रहे कनाडा से आए दो कलाकार सौम्या और सुरम्या। इन्होंने युवा कलाकारों और छात्रों के साथ मिलकर पुराने कलश और गमलों पर कपड़े की बची-खुची कतरनों को सुई-धागे से सिलकर गणेश जी की मूर्तियां, मानव आकृतियां और खूबसूरत पोर्ट्रेट तैयार किए। ये कलाकृतियां ‘कचरे से समृद्धि (Waste to Wealth)’ की जीती-जागती मिसाल बन गईं!

क्षेत्रीय सचिव ने बताया कि “यह कार्यशाला महात्मा गांधी के स्वच्छता के विचार को कला के रंगों से जीवंत करने का प्रयास है। हम चाहते हैं कि लोग कचरे को फेंकने की बजाय उसे नई जिंदगी दें और पर्यावरण को बचाएं।”
इस वर्कशॉप में लखनऊ विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय, गोयल इंस्टिट्यूट सहित शहर के कई कलाकार और छात्र हिस्सा ले रहे हैं।
कला विशेषज्ञ डॉ. किरण भारद्वाज के निर्देशन में चल रही यह कार्यशाला 24 दिसंबर तक जारी रहेगी। देखिए कुछ झलकियां, जहां कचरा बन रहा है कला का जादू!






