- संघर्ष समिति प्रतिनिधि मण्डल ने समाज कल्याण मंत्री से की मुलाकात, सौंपा ज्ञापन, कहा समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी शासनादेश हो निरस्त पूर्व की भांति निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था हो बहाल
लखनऊ, 24 जुलाई 2018: आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने कहा है कि उप्र सरकार द्वारा पहले आरक्षण पर कुठाराघात किया गया, फिर पदोन्नति में आरक्षण की बहाली पर चुप्पी साधी जा रही है और अब एक नया मामला सामने आया है कि यूपी सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा 1 माह पूर्व गुपचुप तरीके से आरक्षण के जनक छत्रपति साहू जी महाराज की जयन्ती के दिन 26 जून 2018 को कक्षा-10 से ऊपर के अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों को संस्थानों में अनुमोदित पाठ्यक्रम में अनुमन्य छात्र प्रवेश क्षमता की 40 प्रतिशत छात्र सीमा तक अनुजाति/जनजाति छात्रों को ही प्रथम आगत प्रथम पावत के आधार पर निःशुल्क प्रवेश में एक बदलाव करते हुए यह नयी व्यवस्था बना दी गयी कि निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था बाध्यकारी नहीं होगी और साथ ही निःशुल्क प्रवेश की सुविधा निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में अनुमन्य नहीं होगी।
इस मामले के संज्ञान में आते ही आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र ने अविलम्ब आपात बैठक बुलायी और उसी क्षण आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा के नेतृत्व में 8 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। संघर्ष समिति द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में सरकार द्वारा जारी शासनादेश दिनांक 26-6-18 को अवलिम्ब निरस्त कर पूर्व की भांति निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था को अनु.जाति/जनजाति के छात्रों के लिये बहाल करने की मांग उठायी।
प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री श्री रमापति शास्त्री ने संघर्ष समिति को यह आश्वासन दिया कि शासनादेश में इंगित ‘‘यह व्यवस्था बाध्यकारी नहीं‘‘ में बदलाव किया जायेगा। जिससे दलित छात्रों का हक मारा न जाये।
इस मौके पर समाज कल्याण मंत्री से मिलने वाले आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था से पूरे प्रदेश में दलित छात्रों को शिक्षा से वंचित करने का षडयंत्र किया जा रहा है, जो संघर्ष समिति कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। संघर्ष समिति ने मंत्री जी को उप्र में आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 3(7) को दिनांक 15-11-1997 से बहाल कराने हेतु अलग से एक ज्ञापन भी सौंपा, जिस पर उनके द्वारा मुख्यमंत्री से बात करने का आश्वासन दिया गया।






