- आरक्षण बचाओं बोले: संविधान प्रदत्त अधिकार के खिलाफ बोलना संविधान का विरोध है
- संघर्ष समिति ने मोदी सरकार से उठायी माॅग कहा, संविधान के खिलाफ बयानबाजी करने वालों के खिलाफ केन्द्र व उत्तर प्रदेश सरकार उठाये कड़ा कदम
लखनऊ, 16 नवंबर 2018: पदोन्नतियों में आरक्षण व एससी/एसटी ऐक्ट पर पूर्व मंत्री श्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया द्वारा दिये गये असंवैधानिक बयान पर आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति की आवश्यक बैठक में आज आरक्षण समर्थकों का गुस्सा फूठ पड़ा। आरक्षण समर्थकों ने राजा भैया पर करारा हमला बोलते हुये कहा पदोन्नतियों में आरक्षण व एससी/एसटी ऐक्ट संविधान प्रदत्त अधिकार है उसके खिलाफ कोई बयानबाजी संविधान का विरोध है।
संघर्ष समिति ने कहा कि विगत दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नतियों में आरक्षण पर अपना निर्णय सुनाया जा चुका है अब ऐसे में राजा भैया का यह कहना कि पदोन्नति का आधार क्या होगा पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि राजा भैया को कोई अधिकार नहीं है कि वह दलित समाज के लिये बनाये गये कानून पर कुठाराघात और गलत बयानबाजी करें। आरक्षण समर्थक ऐसे बयानबाजी को बर्दाश्त करने वाले नहीं है, समय आने पर वोट की ताकत से हिसाब बराबर करेगें।
इस मामले पर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों में सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, डा. राम शब्द जैसवारा, केबी राम, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, प्रेम चन्द्र, रंजीत कुमार, विकास दीप ने एक सयुंक्त बयान में कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि संविधान प्रदत्त अधिकार के खिलाफ भारतीय राजनीति में जो देखो वही गलत बयानबाजी करने पर आमादा है ऐसे में केन्द्र की मोदी सरकार को ऐसे बयानबीरो के खिलाफ विधिक कार्यवाही करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के किसी भी नागरिक को संविधान में दी गई व्यवस्था के खिलाफ बोलने का कोई अधिकार नहीं है। कुछ दिनों से पूरे देश में दलित व पिछड़े के सभी आरक्षण समर्थक एक मंच पर आ रहे है इससे आरक्षण विरोधियों के होश उड़ गये है, जिस प्रकार से परिदृश्य बदला है और अब देश में दलित पिछड़ा एकजुट होकर अपने अधिकार की बात करने लगा है, यह किसी को पच नहीं रहा है।







