कानपुर, 16 मई। आइटीएमएस के तहत शहरवासियों को यातायात नियमों की अहमियत समझाने में बजट की कमी आड़े आ रही है। चौराहों पर लगे कैमरे से हर रोज सैकड़ों चालान हो रहे हैं लेकिन जेब्रा लाइन व स्टॉप लाइन वायलेशन के चालान लोगों के घर नहीं भेजे जा पा रहे। क्योंकि विभाग के पास पर्याप्त डाक टिकट की ही व्यवस्था नहीं हो सकी है।
एक मई से एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली (आइटीएमएस) की शुरुआत हुई। बड़ा चौराहा व विजय नगर में रेड लाइट व जेब्रा लाइन वायलेशन करने वाले वाहनों के ई-चालान शुरू हुए लेकिन अफसर केवल रेड लाइट वायलेशन के चालान ही लोगों के पतों पर भिजवा पा रहे हैं। जेब्रा लाइन या उसके आगे जाकर रुकने वाले किसी भी वाहन स्वामी को चालान नहीं भेजा गया। कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक अब तक जेब्रा लाइन तोड़ने वाले करीब 12 हजार वाहनों का चालान हो चुका है। ये चालान आइटीएमएस के सर्वर पर सुरक्षित किए गए हैं।
डाक टिकट की व्यवस्था में जुटी पुलिस
हजारों की संख्या में हो चुके स्टॉप लाइन वायलेशन के ई चालानों को भेजने के लिए ट्रैफिक पुलिस डाक टिकट की व्यवस्था भी नहीं कर पा रही है। पुलिस के मुताबिक एक चालान को रजिस्टर्ड डाक से भेजने में करीब 22 रुपये की टिकट लग रही है। ऐसे में हजारों ई चालान भेजने के लिए लाखों रुपये बजट की व्यवस्था होनी है।
‘शासन स्तर पर वार्ता चल रही है। बजट मिलने के बाद जेब्रा लाइन वायलेशन वाले चालानों को भी भेजा जाएगा। वहीं रेड लाइट वायलेशन के चालान कम हैं, उन्हें हर रोज भेजा जा रहा है।’
— सुशील कुमार, एसपी ट्रैफिक
बाहरी वाहनों का भी चालान नहीं
एनआइसी से वाहनों का नेशनल डाटा मिले पांच दिन बीत गए लेकिन अब तक नियम तोड़ने वाले किसी भी बाहरी जिले या राज्य के वाहन स्वामी को भी चालान नहीं भेजा गया। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि चालानों की टेस्टिंग चल रही है।
117 लोगों ने जमा किया शमन शुल्क
ई-चालान जैसे-जैसे लोगों के घर पहुंच रहे हैं, जुर्माना जमा करने आने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। रेड लाइट वायलेशन में अब तक 117 लोगों ने 11700 रुपये शमन शुल्क जमा किया। वहीं, मंगलवार तक करीब 800 लोगों के पतों पर चालान भेजा गया।







