उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, कहा: पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन कर रहा जनता के साथ धोखा, सरकार की छवि हो रही धूमिल, करें हस्तक्षेप और दिलायें न्याय
लखनऊ, 12 मई। प्रदेश के लगभग 60 लाख अनमीटर्ड ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से 5 प्रतिशत की जगह अर्थ का अनर्थ लगाकर लगभग 5 वर्षों तक 20 प्रतिशत वसूल की गयी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी की वापसी के लिए उपभोक्ता परिषद की लड़ाई के बाद प्रमुख सचिव (ऊर्जा) द्वारा 5 अप्रैल को सभी प्रबन्ध निदेशकों को यह आदेश जारी किये गये थे कि अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी सम्बन्धित विद्युत उपभोक्ताओं के बिल में तब तक समायोजित किया जाये, जब तक उनकी अधिक वसूली का समायोजन समाप्त न हो जाए। यानि कि आगे उनसे जो 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिसिटी ड्यिूटी की वसूली होनी थी वह तब तक शून्य रहेगी। लेकिन धरातल पर आदेश केवल हवा-हवाई साबित हुआ है।
गौरतलब है कि अधिक वसूल की गयी ड्यिूटी को वापस कराने के लिए उपभोक्ता परिषद को न्याय दिलाने में ऊर्जा मंत्री श्री व नियामक आयोग ने अहम् भूमिका निभाई थी, और अब वापसी आदेश होने के बावजूद भी उसका सही क्रियान्वयन न कराया जाना पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को कटघरे में खड़ा करता है। उपभोक्ता परिषद प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने व ग्रामीण उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने की माँग करता है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने जब आज इसकी सच्चाई पता करने के लिए जब अपने प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से संपर्क किया और उनके अप्रैल व मई के कुछ बिलों को मंगाकर देखा तो होश उड़ गये। बिलों में कोई भी समायोजन नहीं किया जा रहा है और यथावत् 5 प्रतिशत की वसूली धड़ल्ले से की जा रही है।
उपभोक्ता परिषद जब उसकी तह में गया तो पता चला कि प्रमुख सचिव (ऊर्जा) व पावर कार्पोरेशन वाणिज्य शाखा द्वारा जो समायोजन के आदेश कम्पनियों को भेजे गये हैं, उससे वापसी तब तक नहीं होने वाली, जब तक बिलिंग साफ्टवेयर में बदलाव के लिए कार्पोरेशन की आईटी शाखा को निर्देश नहीं दिये जायेंगे। अब सवाल यह उठता है कि उपभोक्ताओं से अधिक वसूल की गयी लगभग 523 करोड़ रू0 की वापसी करने के लिए पावर कार्पोरेशन यह कैसा खेल, खेल रहा है। उसके द्वारा की जा रही कार्यवाही जहाँ उपभोक्ता विरोधी साबित हो रही है, वहीं उप्र सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि 5 वर्षों में तय टैरिफ के बिल पर अलग-अलग 60 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं में से हर विद्युत उपभोक्ता से अधिक वसूल की गयी इलेक्ट्रिसिटी ड्यिूटी का अंश लगभग रू0 940/- है। ऐसे में पावर कार्पोरेशन को इसकी वापसी कराने के लिए ठोस योजना बनाना होगा, क्योंकि वर्तमान में लाखों विद्युत उपभोक्ता, जो पहले अनमीटर्ड थे, आज वह मीटर्ड हो गये हैं। ऐसे में प्रत्येक उपभोक्ता को अधिक वसूल की गयी ड्यूटी को वापस कराने के लिए पावर कार्पोरेशन को एक ठोस योजना बनाना होगा और उसकी सतत् मानीटरिंग करना पड़ेगा।







