ग्रामीण बैंक से नगदी नदारद, खाताधारक परेशान

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साण्डा (सीतापुर)। शादी विवाह का सीजन, खेती बाड़ी के काम, घर परिवार की तमाम जरूरतें ऐसे में खाली जेब तो कैसे पूरे हो पाएंगे जरूरी काम, जब कई कई दिनों तक बैंक शाखा के चक्कर लगाने के बावजूद हजार-दो हजार की नगदी भी नहीं मिल पा रही है।

सकरन ब्लाक मुख्यालय पर स्थित इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा साण्डा में विमुद्रीकरण के दौर से लेकर अब तक कैश की किल्लत बनी हुई है। बैंक के खाता धारकों को आए दिन खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। खाताधारक रामलाल, रामकिशोर, सोहनलाल, कमलेश, सुंदरलाल, राकेश ने बताया कि उनके घर में वैवाहिक कार्य सम्पन्न होना है। तमाम तैयारी पूरी करने के लिए नगदी की जरूरत है लेकिन बैंक शाखा में आया गन्ने की फसल का भुगतान बैंक में नगदी न होने से नहीं मिल पा रहा है।

वहीं कमला देवी, रामपती, मेवालाल, राशिद, इरफान आदि ने बताया कि परिजनों की दवा के लिए दो-चार हजार की नगदी की बहुत जरूरत है लेकिन खाते में जमा अपना ही पैसा मुसीबत के समय में भी नहीं मिल पा रहा है। सुनील, अशोक, प्यारेलाल, जगन्नाथ, मुरली, रामनाथ, दिवाकर आदि ने बताया कि खेती-बाड़ी की तैयारी, फसलों की सिंचाई, उर्वरक आदि के लिए पैसों की बहुत जरूरत है लेकिन बैंक शाखा के कई चक्कर लगाने के बावजूद नगदी न होने की बात बताकर वापस कर दिया जाता है। राजकुमार, सर्वेश, आनंद, बबलू, रामपाल आदि ने बताया कि बच्चों के एडमीशन और उनके लिए पुस्तकें खरीदने के लिए पैसों की बहुत जरूरत है लेकिन बैंक शाखा में नगदी न होने की बात कहकर अगले दिन आने का हवाला दिया जाता है।

जितना पैसा मिलता है खाताधारकों को उपलब्ध करा देते हैं। जब पैसा ही कम मिलता है तो सबकी जरूरत कैसे पूरी की जा सकती है। हमारे द्वारा प्रति दिन उच्चाधिकारियों को बैंक शाखा में नगदी की समस्या बताई जाती है। यदि पर्याप्त नगदी मिल जाए तो खाताधारकों को जरूरत के मुताबिक नगदी मिल जाएगी।-  शाखा प्रबन्धक नरेन्द्र वर्मा