नवजात के लिए अमृत है मां का दूध: डॉ. सलमान

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नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत जिलास्तरीय कार्यशाला आयोजित
लखनऊ, 17 नवम्बर-2018: नवजात शिशु देखभाल सप्ताह के तहत शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में जिलास्तरीय कार्यशाला आयोजित हुई। बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विशेषग्य व कार्यशाला के मास्टर ट्रेनर डॉ. सलमान ने कहा कि नवजात के लिए मां का दूध अमृत समान होता है।
उन्होंने कहा कि जन्म के पहले घंटे में मां का पीला गाढ़ा दूध नवजात को कई तरह की बीमारियों से बचाने का काम करता है। इसके साथ ही बच्चे को छह माह तक मां के दूध के अलावा कुछ और नहीं देना चाहिए। छह माह बाद बच्चे को विकास के लिए मां के दूध के साथ हल्का पूरक आहार भी देना चाहिए। कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने की। इस अवसर पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (आरसीएच) डॉ. अजय राजा व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। ज्ञात हो की पूरे प्रदेश में 14 से 21 नवम्बर तक नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है।
कार्यशाला में उपस्थित जिले के सभी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारी, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी व अन्य विभागों के लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. सलमान ने कहा कि नवजात की जान बचाना हम सभी का परम कर्तव्य है। इसके लिए उन्होंने जरुरी टिप्स भी दिए।
उन्होंने बताया कि बच्चे को अस्पताल से तब तक डिस्चार्ज नहीं करना चाहिए जब तक की वह भलीभांति मां का दूध न पीने लगे। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य जरुरी उपाय भी बताये जो की नवजात को लम्बी उम्र देने के लिए बहुत ही जरुरी हैं, जैसे- नवजात को तुरंत नहलाएं नहीं, शरीर पोंछकर नर्म साफ़ कपड़े पहनाएं, जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और जरुरी इंजेक्शन लगवाएं, नियमित और सम्पूर्ण टीकाकरण कराएं, नवजात की नाभि सूखी और साफ़ रखें और संक्रमण से बचाएं, मां और शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी ध्यान दें, कम वजन और समय से पहले जन्में शिशुओं पर खास ध्यान दें, शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) विधि अपनाएँ, शिशु जितनी बार चाहे दिन अथवा रात में बार-बार स्तनपान कराएं, नवजात को काजल न लगाएं और कान व नाक में तेल न डालें। तेल की मालिश कर सकते हैं और कुपोषण व संक्रमण से बचाव के लिए छह माह तक केवल मां का दूध पिलायें, शहद, घुट्टी, पानी आदि न पिलायें।
पुरुष नसबंदी पखवारा पर भी कार्यशाला :
पुरुष नसबंदी पखवारा 21 नवम्बर से चार दिसम्बर तक मनाये जाने पर भी शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में जिलास्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी। इस अवसर पर सेन्टर ऑफ़ एक्सीलेंस केजीएमयू, लखनऊ के यूरोलाजी विभाग के मास्टर ट्रेनर-एनएसवी डॉ. एनएस डसीला ने कहा कि समाज में एक बहुत बड़ा मिथक है कि ज्यादातर पुरुष नामर्द होने के डर से नसबंदी नहीं करवाते हैं, जबकि पुरुष नसबंदी करने की प्रक्रिया बहुत ही सुरक्षित और लम्बे समय तक के लिए बहुत ही आसान है।
इस पखवारे की थीम:पुरुषों ने अपनाई नई पहचान-परिवार नियोजन में भागीदारी से बढ़ाया सम्मान” है। कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि पखवारे के पहले चरण में 21 से 27 नवम्बर तक हर जिले में एएनएम/आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भ निरोधक साधनों के प्रयोग (कंडोम, पुरुष नसबंदी) के लिए इच्छुक दम्पतियों की पहचान, संवेदीकरण और पंजीकरण किया जाएगा।
परिवार नियोजन में पुरुष भागेदारी और इसके साथ जुड़े विभिन्न मिथकों को संबोधित करते हुए सार्वजानिक स्थलों, स्वास्थ्य इकाइयों और मेडिकल कालेजों में प्रचार-प्रसार सामग्री को प्रदर्शित किया जाएगा। दूसरे चरण सेवा प्रदायगी में 28 नवम्बर से चार दिसम्बर तक पुरुष नसबंदी की सेवाएं प्रदान करने के लिए स्वास्थ्य इकाइयों को चिन्हित करते हुए सभी जरूरी लोजिस्टिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी।

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