- आरक्षण समर्थकों ने कहा भाजपा सरकार बनने के बाद दलितों का उत्पीड़न बढ़ा, पदोन्नति बिल लम्बित रखकर देश के लाखों दलित कार्मिकों को केन्द्र सरकार करा रही है अपमानित
लखनऊ, 06 मई। आरक्षण के जनक, बहुजनों के उद्धारक छत्रपति साहूजी महाराज के 95वें स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजक मण्डल द्वारा आज उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। आरक्षण समर्थकों ने छत्रपति साहू जी महाराज को याद करते हुए कहा कि सबसे पहले इन्हीं के द्वारा आरक्षण की शुरूआत की गयी, जिसके चलते ही देश में आज समाज के दबे कुचले दलित समाज के लोगों को मुख्य धारा में आने का अवसर मिल रहा है, लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है जब से केन्द्र में मोदी की सरकार आयी है तब से लगातार पूरे देश में आरक्षण पर कुठाराघात हो रहा है। दलितों का उत्पीड़न हो रहा है, उनके ऊपर हमले हो रहे हैं और सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात यह है कि देश में दलित कार्मिकों के सबसे बड़े संवैधानिक हक पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल आज भी लोकसभा में लम्बित है। जिसके चलते उप्र व कर्नाटक में लाखों की संख्या में दलित कार्मिक रिवर्ट हुए।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, अन्जनी कुमार, एसपी सिंह, बनी सिंह, राधेश्याम, महेन्द्र सिंह, दिनेश कुमार, प्रेम चन्द्र, अजय चौधरी, दिग्विजय सिंह, योगेन्द्र रावत, रामेन्द्र कुमार, सुनील कनौजिया ने कहा कि छत्रपति साहू जी महाराज ने सर्वप्रथम 1902 में ही अपने राज्य में समाज में समानता कायम करने के लिये आरक्षण की शुरूआत की और तब से लेकर आज तक आरक्षण की व्यवस्था संवैधानिक रूप से देश में लागू है।
लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि भारत देश में आरक्षण को लागू कराने की जिम्मेदारी जिनके ऊपर है, वह जिम्मेदार नहीं हैं। जिससे आरक्षण संवैधानिक अधिकार होने के बाद भी उसका लाभ दलित समाज को नहीं मिल रहा है। आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है उसका विरोध संविधान का विरोध है। इसके बावजूद भी आये दिन आरक्षण के खिलाफ कुठाराघात होता रहता है। केन्द्र व राज्यों की सरकारें चुपचाप तमाशा देखती हैं, जिससे पूरे देश के दलित समाज में काफी गुस्सा है।






