परिचालकों और चालकों की शिकायत इसलिए नही होती कार्रवाई
लखनऊ, 16 मई। उत्तर प्रदेश के रोडवेज को निगम के अधिकारी ही डूबो रहे है। पिछली सरकार की तरह इस सरकार भी भी परिवहन निगम में भ्रष्टाचार फलफूल रहा है। चालक परिचालक से पैसा लेकर उन्हें कमाऊ रूट पर डियुटी लगाई जा रही है। परिवहन निगम की बसों के कमाई वाले रूट पर खुलेआम ड्यूटी बिक रही है। एक फेरे की कीमत है 5000 से 8000 तक। जो कंडक्टर कीमत चुकाता है, वही तय रूटों पर मलाई काटता है। सबसे ज्यादा मांग में है दिल्ली-जयपुर का रास्ता। यहां ड्यूटी के लिए मारामारी चल रही है।इसी मारामारी के बीच एक कंडक्टर अनूप सिंह ने जब आलमबाग डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक विवेकानंद तिवारी से ड्यूटी न दिए जाने की शिकायत की, तब मामला सामने आया। कंडक्टर ने आरोप लगाया कि केंद्र प्रभारी पैसा लेकर ड्यूटी लगाता हैं।इस शिकायत पर सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने ड्यूटी रजिस्टर का जायजा लिया और उसमें उल्लेख किया कि पैसा लेकर ड्यूटी दी जा रही केंद्र प्रभारी जवाब दें।
दरअसल यह सारा खेल लगेज को बिना बुक किए ले जाने से होने वाली कमाई का है। ड्यूटी खरीदने वाला कंडक्टर हफ्ता देने एवं कमाई करने के लिए लगेज को बुक नहीं करते। यात्री से भाड़ा तो वसूला जाता है, लेकिन वह सरकारी खजाने में जाने के बजाय कंडक्टर की जेब में जाता है।कंडक्टर को ड्यूटी ही नहीं खरीदनी पड़ती, बल्कि उससे तीन-तीन सेक्शन के कर्मचारी उगाही करते हैं। ड्यूटी पर जाने के दौरान 20 रुपये देकर इलेक्ट्रॉनिक्स टिकट मशीन लेनी पड़ती। घूस न देने पर कर्मचारी खराब टिकट मशीन दे देगा। कंडक्टर को बैग लेेने पर 50 रुपये की घूस देनी पड़ती। हालाकि एचएस गाबा, मुख्य प्रधान प्रबंधक (संचालन) परिवहन निगम का कहना है कि कंडक्टर से पैसा लेकर ड्यूटी देना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। इसके साक्ष्य मिलेंगे तो दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रकरण संज्ञान में आ गया है जिसकी जांच कराएंगे।
कर्मचारी घूस नहीं पाते को बैग होने वाले मैनुअल टिकट को गायब करके उसकी पेनाल्टी कंडक्टर से वसूलते। कंडक्टर जब ड्यूटी से वापस लौटता तो सरकारी रकम जमा करने वाला लिपिक 20 रुपये लेता। उसका 20 रुपये न दिए जाए तो ड्यूटी छोड़कर कर चला जाता और कंडक्टर नोट लेकर काउंटर तब तक खड़ा रहता, जब तक वह वापस नहीं आता है।लखनऊ परिक्षेत्र में एक बस अड्डे के केंद्र प्रभारी का बेटा चारबाग डिपो में संविदा कंडक्टर है। लेकिन उसको कमाई कराने के लिए आलमबाग डिपो में लखनऊ से जयपुर के बीच आवागमन करने वाली एसी बस में नियमों को दरकिनार करके ड्यूटी कराई जा रही है। इस रूट की ड्यूटी पाने के लिए कंडक्टर को हर महीने 8000 रुपये की घूस देनी पड़ रही है।बस चेकिंग से इस कदर कमाई है कि कर्मचारी प्रमोशन पाने के बाद भी अफसरों के संरक्षण में बस चेकिंग करने लगे हैं।
लखनऊ परिक्षेत्र में यातायात निरीक्षक से प्रमोशन पाकर हेड क्लर्क बनने वाले अफसरों की कृपा से बस चेकिंग करके कंडक्टरों का शोषण कर रहे हैं। ऐसे ही एक हेड क्लर्क जिनकी पोस्टिंग नोएडा में ,लेकिन अटैच होकर लखनऊ की बसों की चेकिंग करके कमाई कर रहे। बकायदा जयपुर 8000 प्रति माह,दिल्ली 5000 प्रति माह, वाराणसी 500 प्रति ड्यूटी और गोरखपुर 300 प्रति ड्यूटी ली जाती है।







