वर्ष 2018-19 की बिजली दर प्रक्रिया को आयोग ने सुओ मोटो किया स्वीकार, 3 दिन के अन्दर बिजली कम्पनियों को समस्त ब्यौरा समाचार पत्रों में विज्ञापित करने का आदेश
लखनऊ, 14 नवंबर 2018: उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2018-19 का टैरिफ व वर्ष 2015-16 का टूªअप व वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 का एनवल परफारमेंस रिव्यू पर सुओ मोटो कार्यवाही स्वीकार करते हुये आगामी बिजली दर की प्रक्रिया को चालू करते हुये सभी बिजली कम्पनियों को आगे की कार्यवाही के लिये निर्देश जारी कर दिया है।
नियामक आयोग द्वारा सुनाये गये फैसले में कहा कि तीन दिन में सभी पैरामीटर समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से प्रदेश की जनता को बताना होगा और उसके बाद प्रदेश की जनता व विद्युत उपभोक्ता को यह अधिकार होगा कि वह 15 दिन के अन्दर अपनी आपत्तियाॅं व कोई भी सुझाव आयोग को सौंप सकते हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 की टैरिफ पर बिजली कम्पनियों द्वारा कोई याचिका न दिये जाने के चलते आयोग द्वारा सुओ मोटो कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है। यह कहना गलत नही होगा कि आगामी बिजली दर की प्रक्रिया अब विधिवत शुरू हो गयी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि सभी बिजली कम्पनियों का जो वर्ष 2018-19 का एआरआर सामने आ रहा है वह लगभग 75610 करोड का है वहीं जो कुल बिजली खरीद अनुमानित है वह लगभग 130724 मिलियन यूनिट है। बिजली खरीद की कुल लागत लगभग 53473 करोड होने की संभावना है और वर्ष 2018 का जो गैप आने वाला है वह लगभग 7770 करोड होगा। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा सामने आने वाला है कि जो राजकीय सब्सिडी सामने आने वाली है वह लगभग 8900 करोड के करीब होगी। अन्य जो तथ्य सामने आयेंगे उसका खुलासा समाचार पत्रों में विज्ञापन से हो जायेगा। सूत्रों के मुताबिक बिजली खरीद की औसत लागत लगभग रू0 4.55 प्रति यूनिट के करीब रहने की संभावना है और वहीं वितरण हानियाॅं लगभग 16 प्रतिशत के आसपास हो सकती है।
अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उत्पादन निगम में बिजली लागत में लगभग 54 पैसा प्रति यूनिट की कमी की याचिका पर आयोग द्वारा पहले ही यह फैसला सुनाया जा चुका है कि इस पूरे मामले पर वर्ष 2018-19 की बिजली दर के साथ सुना जायेगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे में यह कहना गलत नही होगा कि इस बार प्रदेश की जनता को बिजली दरों में कमी का बडा तोहफा मिल सकता है। बिजली कम्पनियों द्वारा समाचार पत्रों में प्रकाशित आंकडों के बाद उपभोक्ता परिषद पूरी तैयारी के साथ नियामक आयोग में अपनी आपत्तियाॅं व सुझाव पेश करते हुये यह सिद्ध करेगा कि आगामी बिजली दरों में घरेलू किसानों व ग्रामिणों की बिजली दरों में वर्तमान में कमी किये जाने का विधिक प्रमाण उपलब्ध है। और निश्चित तौर पर यह कहना गलत नही होगा कि अव वह दिन आ गया है कि जब प्रदेश की आम जनता को बिजली दरों में कमी का तोहफा मिलेगा।







