- पुनर्विचार जनहित प्रत्यावेदन लोक महत्व याचिका पर 2 मई को आयोग करेगा सुनवाई
- बिजली दर बढ़ोत्तरी की पुनर्विचार याचिका पर नियामक आयोग में सुनवाई के पहले उपभोक्ता परिषद ने उप्र सरकार के सामने रखी जनहित में बड़ी मांग कहा सरकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत आयोग से करे बिजली दरों में कमी की सिफारिश
लखनऊ, 29 अप्रैल। प्रदेश के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 50 से 150 प्रतिशत वृद्धि व आम जनता की दरों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि के खिलाफ उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की तरफ से विद्युत नियामक आयोग में दाखिल पुनर्विचार जनहित प्रत्यावेदन लोक महत्व याचिका पर 2 मई को जहां आयोग द्वारा सुनवाई आयोजित की गयी है। वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद ने उप्र सरकार से भी जनहित में हस्तक्षेप करने की मांग उठायी है। एक तरफ पावर कार्पोरेशन एक नयी पुनर्विचार याचिका दाखिल कर उपभोक्ताओं पर फिर भार डलवाने पर आमादा है और वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी में कमी कराने के लिये संघर्षरत है। ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि उप्र सरकार जनता के हितों के साथ खड़ी होती है या जनता पर अपनी अक्षमता का भार डलवाने वाले पावर कार्पोरेशन के साथ।
उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मा. मुख्यमंत्री महोदय से किसानों आम जनता व घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के हितों में यह मांग उठायी है कि उप्र सरकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत नियामक आयोग से लोक महत्व का विषय मानते हुए सिफारिश करे कि आयोग उपभोक्ता परिषद की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए बिजली दरों में कमी करने पर विचार करे। निश्चित ही सरकार द्वारा यदि इस प्रकार का कदम उठाया जाता है तो उपभोक्ता परिषद अपने विधिक तर्कों के आधार पर बिजली दरों में कमी कराने में पूरी तरह सफल हो जायेगा और सुनवाई में पूरी ताकत झोंकेगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा 1943 में बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि ‘‘बिजली सस्ती नहीं बहुत सस्ती होनी चाहिए‘‘ ऐसे में जब बाबा साहब की 127वीं जयन्ती के अवसर पर पूरे देश में फ्री बिजली कनेक्शन दिये जा रहे तो वहीं सरकार को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाना चाहिए।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से विगत दिनों उत्तराखण्ड सरकार ने अपने विद्युत उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बिजली दरों में कमी करायी। उसी प्रकार उप्र सरकार को भी बिजली दरों में कमी कराने का प्रयास करना चाहिए। वह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि वर्तमान में विगत दिनों आंधी तूफान से अनेकों जिलों में किसानों की फसलें बर्बाद हो गयी। ग्रामीण उपभोक्ताओं की दरों में इतिहास में पहली बार लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि से ग्रामीण उपभोक्ता परेशान व बेहाल है, ऐसे में उप्र सरकार का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वह 2 मई को आयोग में सुनवायी के पहले जनता को राहत दिलाने की दिशा में उचित कदम उठाना चाहिए।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान में गरीब उपभोक्ताओं को फ्री में कनेक्शन दिया जा रहा है लेकिन गरीब उपभोक्ता बिजली का बिल कैसे अदा करेगा? इस दिशा में भी गरीब उपभोक्ताओं के हितों में उप्र सरकार को सोचना चाहिए। विगत दिनों उपभोक्ता परिषद ने इस गम्भीर मुद्दे पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से बात की थी और एक प्रस्ताव भी दिया था। जिस पर ऊर्जामंत्री द्वारा गहन विचार करने का आश्वासन दिया गया था। ऐसे में उप्र सरकार को अविलम्ब जनता को राहत देने के लिये उचित कदम उठाना चाहिए।







