77 करोड से बढ़कर घाटा 85 हजार करोड़ कैसे हो गया: उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन पर उठाएं सवाल

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  • बिजली दर पर उपभोक्ता परिषद ने आयेाग में दाखिल की आपत्तियां, पावर कारपोरेशन पर लगाया बडा आरोप कहा वर्ष 2000 में मात्र 77 करोड के घाटे में बिजली कम्पनियाॅं कैसे पहुच गयीं अब 85 हजार करोड के घाटे में।
  • 100 करोड से ज्यादा के ऊपर रखे गये कंसल्टेन्ट सुधार के नाम पर बिजली अभियन्ताओं को विगत में 50 हजार से 2.5 लाख का नगद इनाम फिर भी बिजली कम्पनियां फिसडडी क्यों?

लखनऊ, 28 नवंबर 2018: पावर कारपोरेशन पर उपभोक्ता परिषद ने बड़ा आरोप लगाया उन्होंने पावर कारपोरेशन से पूंछा कि वर्ष 2000 में मात्र 77 करोड के घाटे में बिजली कम्पनियाॅं अब 85 हजार करोड के घाटे में कैसे पहुच गयीं?

बता दें कि विद्युत नियामक आयोग के सुओ मोटो आदेश पर बिजली कम्पनियों द्वारा वर्ष 2018-19 के लिये बिजली दर संबंधित प्रकाशित विज्ञापन व टू्रअप वर्ष 2016-17 एवं वार्षिक परफारमेंस वर्ष 2017-18 पर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हित में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आज अपनी आपत्तियाॅं नियामक आयोग सचिव संजय श्रीवास्तव से मिल कर उन्हें सौंप दीं।

उपभोक्ता परिषद द्वारा अपनी आपत्तियों में प्रमुख रूप से यह मुददा भी उठाया गया कि प्रदेश की बिजली कंपनियां सुधार के बड़े- बड़े दावे करती हैं, लेकिन वर्ष 2000-2001 में बिजली कम्पनियों का जो कुल घाटा मात्र 77 करोड़ था, वह अब वर्तमान में लगभग 85 हजार करोड कैसे हो गया?

उन्होंने कहा कि सबसे बडा चौकाने वाला मामला यह है कि उदय अनुबन्ध जब हुआ था तब घाटा मात्र 70 हजार 738 करोड था और उदय अनुबन्ध कर बड़े- बड़े दावे किये गये थे। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि मार्च 2018 तक बिजली कम्पनियों का सरकारी विभागों पर 10 हजार 756 करोड का बकाया हो गया।

उन्होंने कहा कि उप्र में बिजली दुर्घटनाओं से जहाॅं पूरे साल 400 लोगों की जाने पहले जाती थीं वहीं अब लगभग 958 लोगों की जानें गयी हैं। केंद्र सरकार द्वारा बिजली कंपनियों की रेटिंग में एक बिजली कम्पनी को छोडकर सभी फिसडडी साबित हुयी हैं। बिजली कम्पनियाॅं सबको 24 घंटे बिजली देने की बात कर रही हैं लेकिन शायद वह यह भूल गयीं कि पावर फार आल में 33 केवी स्तर पर वितरण ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता लगभग 44677 एमवीए बतायी गयी है यानि कि सिस्टम की क्षमता लगभग 3 करोड 79 लाख किलोवाट।

वहीं सितम्बर 2018 तक कुल विद्युत उपभोक्ताओं की जो संख्या है वह लगभग 2 करोड 21 लाख है और उनके द्वारा स्वीकृत भार जो लिया गया है वह 5 करोड 45 लाख किलोवाट हे। ऐसे में कारपोरेशन की क्षमता और उपभोक्ताओं के द्वारा लिये गये भार के बीच लगभग 2 करोड किलोवाट का अंतर है ऊपर से 25 प्रतिशत बिजली चोरी का लोड। ऐसे में पीक आवर्स में गर्मी में डायवर्सी फैक्टर 1 अनुपात 1 पर यह सिस्टम कैसे चलेगा पूरी तरह मिसमैच है।

उपभोक्ता परिषद ने 100 करोड से ज्यादा के रखे गये कन्सल्टेन्टों पर भी सवाल उठाया कहा कि इस वित्तीय वर्ष मेें केवल 6 माह में 8 हजार करोड का घाटा कैसे? क्या सलाह दे रहे हैं कन्सल्टेंट। नोयडा पावर कम्पनी पर भी हमला बोलते हुए कहा कि जब तक सीएजी आडिट से उपसे वित्तीय मानकों की जाॅंच न हो जाये वहाॅं पर बिजली दरों में तब तक बढोत्तरी पर विचार न किया जायें

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अपनी आपत्तियों में उपभोक्ता परिषद द्वारा आयेाग में लंबित अपनी दो चायिकाओं में सुनाये गये फैसले के आधार पर उत्पादन लागत में 54 पैसा प्रति यूनिट की कमी के आधार पर जहाॅं बिजली दरों में कमी करने का मुददा उठाया वहीं वर्तमान रेग्यूलेटरी सरचार्ज 4.28 प्रतिशत को अविलम्ब समाप्त कर उपभोक्ताओं को रेग्यूलेटरी लाभ दिये जाने की मांग भी उठायी है।

उपभोक्ता परिषद ने घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज को समाप्त करने व वाणिज्यक विद्युत उपभोक्ताओं के मिनिमम चार्ज को समाप्त करने के अपने विधिक तथ्य पेश किये हैं। जहाॅं उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन के आंकडों को मनगढंत बताते हुये आडिटेड आंकडे पेश करने का मुददा उठाया है वहीं बिजली कम्पनियों पर एक बडा आरोप लगाते हुये कहा कि वर्ष 2006 के बाद कानून पारित होने के बाद भी अनेकों प्राविधानों में उपभोक्ताओं को बिजली कम्पनियों द्वारा आज तक कोई मुआवजा नही दिया गया। ग्रामीण अनमीटर्ड घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के रूप्या 400 प्रतिकिलोवाट की वर्तमान बिजली दर को मनमाना बताते हुए उसमें भारी कमी करने की मांग उठायी वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता परिषद ने कहा कि सौभाग्या स्कीम के तहत फ्री मंे बिजली कनेक्शन पाने वाले गरीब उपभोक्ताओं के लिये एक नयी टैरिफ की श्रेणी बनायी जाये और उनकी दरें रू0 1 प्रति यूनिट व रू0 1.50 प्रति यूनिट के बीच रखी जाये।

उपभोक्ता परिषद ने बिजली कम्पनियों पर बोलते हुए अपनी आपत्ति में यह मुददा उठाया कि इतने बडे घाटे में पहुच कर भी बिजली कम्पनियाॅं सुधार के नाम पर अभियन्ताओं को रू0 50 हजार से लेकर 2.5 लाख का नगद इनाम भी दे चुकी हैं पर कठोर कदम उठाने की मांग की है। उपभोक्ता परिषद ने आगे कहा कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने उत्पादन लागत पर कमी व लाइन लास में कमी के आधार पर विधान सभा में रू0 3400 करोड का फायदा होना बताया था इसलिये बिजली दरों में स्वतः कमी की जाये।

समय से बिजली का बिल जमा करने वाले विद्युत उपभोक्ताओं को कम से कम 2 प्रतिशत का रिबेट दिया जाये और साथ ही यह भी मुददा उठाया कि बिजली कम्पनियों को 16 प्रतिशत रिटर्न आफ इक्यूटी जो दी जा रही है उसे वापस ली जाये और फिजूलखर्ची रोकने के लिये 10 करोड के ऊपर सभी खर्चों का आयेाग अनिवार्य रूप से अनुमोदन देने पर विचार भी करे।

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