उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और कुलाधिपति आनन्दी बेन पटेल अभिनव प्रयोगों से शिक्षा जगत को प्रेरणा देती है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समरोह में भी उन्होंने ऐसा ही किया। दीक्षान्त को उच्च शिक्षा से ही संबंधित माना जाता है। लेकिन आनन्दी बेन ने इसे व्यापक स्वरूप दिया है। इसके पहले उन्होंने संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के दीक्षांत समारोह में बच्चों को बुलाया था। उनका कहना था कि बच्चों को ऐसे समारोहों से प्रेरणा मिलती है। मेरठ में भी उन्होंने ऐसा ही किया। यहां उन्होंने बच्चों को किताब, कॉपी आदि भेंट की। यह भी बताया कि उनको जो भी उपहार मिलते है, उन्हें वह निर्धन बच्चों को बांट देती है।

इस प्रकार उच्च शिक्षा के दीक्षांत में ऊंची बातों से पहले ही आनन्दी बेन ने बहुत बड़ा सन्देश दिया। एक यह कि पढ़ाई समाप्त करने के बाद भी निर्धन बच्चों के सहयोग की भावना रहनी चाहिए। ऐसा करने से समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का विचार भी आता है। शिक्षा केवल स्वावलंबी ही नहीं बनाती, बल्कि समाज और देश के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने की प्रेरणा भी देती है। आनंदी बेन ने अपने कार्य से यह प्रेरणा दी।
इसी बात को उन्होंने अपने दीक्षान्त संबोद्धन में आगे बढ़ाया। उन्होंने दो अक्टूबर के संदर्भ में महात्मा गांधी की चर्चा की। कहा कि उन्होंने शिक्षा के साथ साथ स्वच्छता का सन्देश दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए अभियान चलाया है। बच्चों और युवाओं को खासतौर पर इससे जुड़ना चाहिये। इसी प्रकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रति जागरूकता होनी चाहिए। फिट इंडिया अभियान के तहत कुपोषण को मिटाने में भी सहयोग अपेक्षित है। नई तकनीक के प्रयोग से हम आगे बढ़ सकते है।
– डॉ दिलीप अग्निहोत्री






