उपभोक्ता परिषद ने कहा: दरों में बढ़ोत्तरी रोकने के लिए लगा देंगे पूरी ताकत, बिजली कम्पनियों को नहीं होने देंगे सफल
लखनऊ, 06 जून 2019: जहाँ प्रदेश की बिजली कम्पनियाँ नियामक आयोग में वर्ष 2019-20 की कुल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) रू0 76495 करोड़ का लेखा-जोखा दाखिल कर कुल गैप 18091 करोड़ का दिखाकर प्रदेश के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी प्रस्ताव देने के फिराक में हैं वहीं उपभोक्ता परिषद ने अपनी लामबन्दी तेज कर दी है।
जहाँ विद्युत नियामक आयोग में विद्युत अधिनियम, 2003 के प्राविधानों के अनुसार विधिक लड़ाई शुरू कर दी है वहीं ग्रामीण, घरेलू, बीपीएल, किसानों की बिजली दरों में कोई बढ़ोत्तरी प्रस्ताव आयोग में न दाखिल होने पाये, के लिए भी उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने अपनी कड़ी घेराबन्दी करते हुए आज प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से शक्ति भवन स्थिति उनके कार्यालय में मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा और उसमें यह आरोप लगाया कि बिजली कम्पनियों की फिजूलखर्ची के चलते ही विगत् दिनों इनाम बाँटने की योजना लाई गयी।
पूरे प्रदेश में चलते हुए मीटर उतार कर स्मार्ट मीटर लगाया जाना वह भी पुरानी तकनीकी के आधार पर, लगातार बिलिंग घोटालों का खुलासा होना। विगत् दिनों जिस प्रकार से उपभोक्ता सामग्री को बेचने का खुलासा होना और अभियंताओं का जेल जाना, करोड़ों रूपये के कंसलटेन्टों का रखा जाना और आईटी विंग सहित बिजली कम्पनियों में अनाप-शनाप टेण्डरिंग प्रक्रिया एडाप्ट किया जाना, मंहगी बिजली खरीद करना यह सिद्ध करता है कि इन्हीं सबके चलते अक्षमता बढ़ी है और आज एक साल का गैप 18091 करोड़ हो गया है, और जिसके चलते भविष्य में दरों में बढ़ोत्तरी करायी जायेगी। इसलिए उप्र सरकार पूरे मामले पर गौर करके हस्तक्षेप करे और पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को यह निर्देश दे कि आम जनता की दरों में कोई बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव विद्युत नियामक आयोग में न दाखिल कराया जाये।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को चर्चा के बाद यह आश्वस्त किया कि बीपीएल, ग्रामीण व किसानों के साथ सरकार पूरी तरह खड़ी है, उनके हितों का संरक्षण हर स्तर पर सुनिश्चित किया जायेगा। उपभोक्ता परिषद के ज्ञापन को हम गम्भीरता से देखेंगे और आम घरेलू जनता के साथ कोई अन्याय नहीं होने देंगे।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि एक तरफ बिजली कम्पनियाँ सुधार के बड़े-बड़े दावे करती हैं। आयोग में खुद वर्ष 2019-20 के लिए वितरण हानियाँ 11.96 प्रतिशत दिखाई गई हैं। उत्पादन निगम द्वारा पैदा होने वाली बिजली उत्पादन लागत में लगभग 0.54 पैसा प्रति यूनिट की कमी आई है और कार्पोरेशन के दावों पर नजर डालें तो राजस्व भी बढ़ रहा है फिर क्या कारण है कि बिजली कम्पनियों का गैप इतना ज्यादा है। इसका मतलब बिजली कम्पनियाँ फिजूलखर्ची पर प्रतिबन्ध नहीं लगा पा रही हैं। यह एक सत्य है कि यदि बिजली के हर क्षेत्र में सुधार हुआ है तो बिजली कम्पनियों को बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव देकर प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि सुधार का फायदा आम जनता को मिल रहा है।







