उपभोक्ता परिषद ने कहा भारत सरकार की ईईएसएल द्वारा खरीदे गये 40 लाख स्मार्ट मीटर के लिये निकाले गये टेण्डर में पहले थी 4जी टेक्नोलाॅजी उसे किसके दबाव में टेण्डर से किया गया बाहर
लखनऊ, 03 जून 2019: उपभोक्ता परिषद के दावे के अनुसार पूरे प्रदेश में खरीदे गये लगभग 40 लाख स्मार्ट मीटर जिसकी कुल प्रोजेक्ट लागत लगभग 1927 करोड़ है। उसमें ली जा रही 2जी व 3जी टेक्नोलाॅजी को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। उपभोक्ता परिषद ने जहां पूरे मामले की शिकायत विगत दिनों प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से की थी, वहीं अब भारत सरकार की एनर्जी एफिशियंसी सर्विसेज लि0 (ईईएसएल) पर उपभोक्ता परिषद ने कहा कि उपभोक्ता परिषद के हाथ वह कागज लग गया है जिसमें 40 लाख स्मार्ट मीटर का टेण्डर जब निकाला गया था तो उसमें सबसे पहले 2जी, 3जी व 4जी टेक्नोलाॅजी मांगी गयी थी फिर किसके दबाव में लेटेस्ट 4जी टेक्नोलाॅजी हटाकर पुरानी टेक्नोलाॅजी के 2जी व 3जी मीटर खरीदे गये जो टेक्नोलाॅजी कभी भी बन्द हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पूरे मामले पर उपभोक्ता परिषद देश के ऊर्जा मंत्री श्री आरके सिंह से समय लेकर मुलाकात करेगा और पूरे मामले की केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करेगा। सबसे बड़ा चौकाने वाला सवाल यह है कि अब बिजली विभाग के लोग भी ईईएसएल की पैरोकारी करते हुए यह तर्क दे रहे हैं कि जब 2जी व 3जी टेक्नोलाॅजी बन्द होगी तो ईईएसएल द्वारा 4जी टेक्नोलाॅजी में स्मार्ट मीटर को फ्री आफ कास्ट कन्वर्ट किया जायेगा।
ऊर्जा विभाग के तकनीकी अभियन्ता इस ओर क्यों नहीं ध्यान देते कि अभी 40 लाख स्मार्ट मीटर में से मात्र 2 लाख मीटर ही उपभोक्ताओं के परिसर पर लगे हैं। फिर ऐसे में क्यों नहीं मीटर निर्माता कम्पनी से सीधे अब यह कह दिया जाता कि जो भी स्मार्ट मीटर अब विभाग को दिये जायें, वह 4जी टेक्नोलाॅजी से निर्मित हों।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विगत दिनों देश के संचार मंत्री द्वारा यह घोषणा की गयी है कि 2020 तक पूरे देश में 5जी टेक्नोलाॅजी पूरी तरह काम करने लगेगी फिर ऐसे में प्रदेश की बिजली कम्पनियां पुरानी टेक्नोलाॅजी पर क्यों माथापच्ची में लगी हैं। सभी कम्पनियों को यह ज्ञात होना चाहिए कि वर्तमान में जो स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के परिसर पर लगाया जा रहा है उसका बीआईएस सर्टिफिकेट 2जी व 3जी पर आधारित है, फिर उसे 4जी में कन्वर्ट करना इतना आसान कैसे है। क्या फिर मीटर का टाइप टेस्ट कराया जायेगा। इन सब विवादों से अच्छा है कि बिजली कम्पनियां अपनी गलती मानते हुए नयी टेक्नोलाॅजी के मीटर खरीदें।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पावर कार्पोरेशन द्वारा खरीदे जा रहे माडम पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 20 से 30 करोड़ रूपये के जो माडम खरीदे जा रहे हैं उसे भी 4जी अथवा 5जी का ही खरीदा जाना चाहिए। अन्यथा की स्थिति में आने वाले समय में उसका भी खामियाजा प्रदेश की जनता भुगतेगी।







