देहरादून, 5 जून : भ्रस्टाचार से जुडी एक बात याद आ गयी कोई पुल ऐसे ही नहीं गिरता, जब लोग गिर जाते हैं तो पुल को भी अपने खड़े होने पर शर्म आती है। तो अपने निर्माताओं का साथ देने के लिए वह भी गिर जाता है। बात खत्म… अब बात खबर की – उत्तराखंड के चमोली जिले के थराली में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बनाया गया 60 मीटर लंबा वैली ब्रिज, जिसकी लागत 2.80 करोड़ रुपये थी, निर्माण के दौरान ढह गया। यह घटना 4 जून 2025 को हुई, जब ठेकेदार के श्रमिकों ने पुल के सपोर्ट और बर्थ को एक साथ हटा दिया, जिसके कारण पुल बीच से टूटकर नदी में गिर गया।
इस घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, ठेकेदार की लापरवाही, और PWD की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सहायक अभियंता जगदीश कुमार टमटा ने स्वीकार किया कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, क्योंकि सपोर्ट स्ट्रक्चर को समय से पहले हटा दिया गया। यह निश्चित रूप से निर्माण प्रक्रिया में नियमों और मानकों की अनदेखी का संकेत देता है।
बता दें कि इस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप स्वाभाविक रूप से उठता है, क्योंकि इतनी बड़ी लागत से बन रहा पुल केवल दो महीने में ढह गया। पहले भी इस क्षेत्र में 2013 और 2018 में बने पुल बाढ़ में बह चुके हैं, जो निर्माण की गुणवत्ता और डिज़ाइन पर सवाल उठाते हैं। ग्रामीणों ने इस मामले की जांच की मांग की है, और यह उचित है कि इसकी गहन जांच हो ताकि यह स्पष्ट हो कि क्या यह लापरवाही थी, भ्रष्टाचार था, या दोनों। सामान्यतः पुल निर्माण में नींव और पर्यावरणीय कारकों (जैसे नदी का प्रवाह, मिट्टी की प्रकृति) का गहन अध्ययन जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में प्रारंभिक जानकारी से लगता है कि मानकों का पालन नहीं किया गया।
हालांकि, यह निश्चित रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि यह केवल भ्रष्टाचार का नमूना है, क्योंकि तकनीकी खामियां, ठेकेदार की गलती, या अपर्याप्त निगरानी भी कारण हो सकते हैं। फिर भी, इस तरह की घटनाएं जनता का भरोसा तोड़ती हैं और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले: तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत किया गया
उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। शीतकाल में धाम की सुरक्षा संभालने वाली ITBP ने अब यह जिम्मेदारी इंडियन रिजर्व बटालियन (IRB) को सौंप दी है। IRB अब यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिससे तीर्थयात्रा और सुगम और सुरक्षित होगी।







