भारतीय संविधान के विरोधियों ने की सुनियोजित साजिश
नवेद शिकोह
लखनऊ,27 जनवरी। ये दो बच्चे भारत माता के लाल थे। अब नहीं रहे। 26 जनवरी के दिन कासगंज की सरजमीं पर भारतीय संविधान के विरोधियों ने संविधान पर हमला किया था। दिन चुना था गणतंत्र दिवस यानी संविधान की वर्षगांठ का। हम सब देशवासी जब गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहे थे।
प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले से भारत के संवैधानिक अधिकारों की बात कर रहे थे। अनेकता में एकता, गंगा-जमुनी तहज़ीब, साम्प्रदायिक सौहार्द, भारत की अखंडता और संविधान के सौंदर्य धर्मनिरपेक्षता के गौरवशाली इतिहास पर हम सब गर्व कर रहे थे। उसी वक्त चंद राष्ट्रद्रोही.. आतंकी.. राष्ट्रपिता के हत्यारों की नस्लें.. भारत की खुशहाली को पाकिस्तान जैसी तबाही में तब्दील करने के प्रयास करने वाले.. भारतीय संविधान के विरोधी… सुनियोजित साजिश के तहत गणतंत्र दिवस के गौरव को चुनौती दे रहे थे।

ये शैतान भारत की इज्जत और अस्मिता संविधान को लूटना चाहते थे। इनका पहला लक्ष्य संविधान में धर्म निरपेक्षता के पन्ने फाड़ना था। इस छीना-झपटी में भारत मां की गोद उजड़ गयी। संविधान के वरक़ फाड़ना तो इनके बाप के भी बस में नहीं था, हां हर बार की तरह इस बार भी मां भारती के एक हिन्दू और एक मुसलमान लाल की जिन्दगी छीन कर दहशत की गर्द उड़ाते ओझल हो गये।
ऊँच-नीच का संघर्ष देश को कर रहा है तबाह:
शायद ये लोग एक तबाह देश पाकिस्तान से अस्लहे या आतंकवाद की कोचिंग लेते हैं। ये कायर और हरामखोर पाकिस्तान से काफी मुतासिर (प्रभावित) हैं। तभी तो भारत के लोकतंत्र को खत्म करके इसे धार्मिक राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ताकि जिस तरह पाकिस्तान में एक मजहब के तमाम मसलक अपने-अपने मसलक के वर्चस्व के लिये एक दूसरे को काट रहे हैं वैसे ही यहां भी जातियों और ऊँच-नीच का संघर्ष देश को तबाह कर दे। और एक बार फिर गोरे भारत को गुलाम बना लें। वैसे ही जैसे अमेरिका दुनिया के धार्मिक राष्ट्रों की आपसी लड़ाई का फायदा उठाकर अपने कब्जे में लेता जा रहा है। इन्होंने कल गोरों के लिए मुखबिरी की थी, और आज भी इन्हीं के लिए काम कर रहे हैं।







