हिंद महासागर में भारत को घेरने के लिए चीन ने बढ़ाई श्रीलंका से नजदीकी

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भारत ने अपनी आपत्ति जाहिर दर्ज कराई

पेइचिंग, नई दिल्ली, 07 फरवरी। मेरी टाइम सिल्क रोड को अधिक प्रभावी बनाने के लिए चीन श्रीलंका से निकटता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ दिनों में चीन ने श्रीलंका में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। भारत के पड़ोस में चीन के इस सिल्क रोड प्रॉजेक्ट को लेकर भारत ने अपनी आपत्ति जाहिर दर्ज कराई है। इस परियोजना से भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़नी स्वाभाविक है। सिल्क रोड प्रॉजेक्ट चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव का हिस्सा है।


भारत इसे एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है:

श्रीलंका की आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना को भेजे एक बधाई संदेश में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा चीन श्रीलंका के साथ बेहतर द्विपक्षीय संबंध विकसित करने का इच्छुक है। शी ने कहा चीन और श्रीलंका ने सिल्क रोड इकनॉमिक बेल्ट और 21वीं सेंचुरी मैरीटाइम सिल्क रोड के संयुक्त निर्माण के ढांचे में अपना सहयोग प्रदर्शित कर सार्थक नतीजे हासिल किए हैं। भारत हिंद महासागर में चीन की इस पहल को सुरक्षा चिंताओं की वजह से एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है।

सिल्क रोड प्रॉजेक्ट 2013 में चीन द्वारा प्रस्तावित बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव (बीआरआई) का हिस्सा है। बीआरआई का उद्देश्य ट्रेड के लिए एशिया को यूरोप और अफ्रीका से जल मार्ग से जोड़ना है। इससे चीन का पूरी दुनिया में दबदबा बढ़ेगा। चीन ने पिछले कुछ सालों में श्रीलंका में हंबनटोटा पोर्ट समेत तमाम परियोजनाओं में 8 अरब डॉलर यानी करीब 512 अरब रुपये का निवेश किया है। वह कोलंबो पोर्ट सिटी प्रॉजेक्ट का भी निर्माण कर रहा है जहां श्रीलंका की योजना एक इंटरनैशल फाइनेशल सिटी स्थापित करने की है। चीन हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना चाहता है। इसके लिए वह हंबनटोटा और अफ्रीका के जिबूती जैसी जगहों पर बंदरगाहों को विकसित कर रहा है।

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