जापान के वैज्ञानिकों ने खोजा लंबी उम्र पाने का राज?

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बताया सोयाबीन खाने से उम्र होती है दीर्घायु

हम इंसानो को लम्बी आयु पाने की चाहत अत्याधिक होती है अपने जीवन मे दीर्घायु होने की आशीर्वाद हमे अपने भारतीय संस्कृति और परंपराओं मे आज भी देखने की मिलता है किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने से उम्र में बड़े-बूढों के पैर छूते ही आशीर्वाद के रूप में हमे हमेशा से मिलती चली आ रही है। सम्पूर्ण दुनिया में सौ वर्षों से भी अधिक उम्र तक जीने वालों की सबसे ज्यादा संख्या जापान के लोगों की है।
अभी हाल ही में जापान के “नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर” के वैज्ञानिकों ने जापानियों की लंबी उम्र मिलने के राज को उजागर किया है। जापान के एक लाख से भी अधिक लोगों पर 15 वर्षों तक लगातार किये गये एक अध्ययन के अनुसार जापानियों के कि लंबी उम्र का राज सुशी एवं सूप के साथ मीसो पेस्ट एवं नेटो जैसे खाद्य पदार्थ खाये जाने से है।
यह खाद्य सोयाबीन से बनाये जाते हैं। इन उत्पादों में वीगन ताेफू और पारंपरिक मीसो, सिरका और नमक के साथ बनाये जाने वाले सुशी, सूप इत्यादि जैसे खाद्य पदार्थ शामिल है। इस तरह के खाद्यों के खाने से हमारे शरीर को जवान बनाये रखने के लिए जिम्मेदार टिश्यू नष्ट नहीं हो पाते हैं।
सोयाबीन से बने खाद्यों के खाने में फाइबर एवं पोटेशियम जैसे विटामिनों की मात्रा बहुत अधिक होने से मानव शरीर के ऊतकों के जो स्वतः ही टूट कर नष्ट हो जाते है उनके टूटने की प्रक्रिया धीमी या न के बराबर हो जाने से उनके लम्बी उम्र तक जीवित रहने का राज यही है।
इस शोध से यह पता चला कि जो लोग मीसो और नेटो खाते थे, उनके समय से पहले मरने की संभावना दूसरों की तुलना में 10% प्रतिशत तक कम होती है। वैज्ञानिकों का ऐसा कहना है कि इन खाद्यों में फाइबर एवं पोटेशियम के साथ ही अन्य ऐसे भी तत्व पाए जाते हैं, जो मानव शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित रखते हैं। जापान में लोग साधारणतः पारंपरिक तौर पर कम से कम 84 वर्षों तक जीवित रहते हैं, जोकि सम्पूर्ण दुनिया में सबसे लम्बी आयु तक जीवित रहने वाले लोगों की है। ज्यादातर जापानी अपने प्रातः काल की शुरुआत मीसो सूप पीकर करते हैं।
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि जापानी लोग अपने लंबी उम्र के लिए प्रतिदिन के आहार शारीरिक कसरत के अतिरिक्त साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं यहां तक कि पुस्कालयों से ली गईं पुस्तक को लौटाने पर उसे यूवी तकनीक से साफ करने के बाद ही अलमारियों में वापस रखते है, ताकि उसमें मौजूद हानिकारक दूषित कीटाणु दूसरों तक पुस्तक के माध्यम से ना पहुंचे। उनकी दिनचर्या में शामिल प्रत्येक कार्य मनुष्य के अच्छे स्वास्थ्य से संबंध रखता है। इस देश के लोग अपने जीवन को हंसते -मुस्कुराते व्यतीत करने की नजरिया के साथ जीते हैं जिसके कारण वहां के लोग एक लंबी उम्र के हकदार होते हैं।
एक और शोध के वैज्ञानिकों ने 45 से 74 वर्ष उम्र के 42,750 पुरुष एवं 50,165 महिलाओं के प्रतिदिन के खान-पान की आदतों के अध्ययन करने के पश्चात यह पता चला कि 13,303 प्रतिभागियों की मृत्यु में 99% तक के लोगों ने अपने भोजन में हरी सब्जी एवं दालों का अधिक मात्रा में सेवन किया था और उनमें से 87% तक के लोग भूख लगने के बावजूद भर पेट खाना खाने की बजाय हमेशा अपनी भूख से थोड़ा कम खाना खाये इसके अलावा नमक का भी सेवन उचित मात्रा में ही किया था।
. प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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