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    Home»मेडिकल

    एक चमगादड़ ने हिला दिया दुनिया को!

    By May 24, 2018 मेडिकल No Comments5 Mins Read
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    जी क़े चक्रवर्ती

    चमगादड़ दुनिया का एक मात्र ऐसा स्तनधारी जीव है जो उड़ सकता हैं। स्तनधारी होने के कारण चमगादड़ दुनिया का एकमात्र ऐसा पक्षी भी हैं जो बच्चे पैदा कर उन्हें दूध पिलाता हैं। दुनिया भर में विभिन्न चमगादड़ों की 1000 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। चमगादड़ सामान्यता रात्रिचर जीव होते हैं।

    बीते दिनों केरल के कोझिकोड़ जिले के मलप्पुरम में ‘निपाह’ नामक एक वायरस ने आतंक मचा दिया था। अब तक इसने 11 लोगो को चपेटे में लिया जिनकी मौत हो गयी। बताया जाता है कि इस वायरस के शरीर मे फैलने से एक तरह का दिमागी बुखार हो जाता है और इस बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्‍कत जैसी परेशानी आती है और फिर मरीज कि हालत बिगड़ती चली जाती है मीडिया ख़बरों के अनुसार इसकी चपेट में आने से तकरीबन 11 लोगों को अपने जान से हाथ धोना पड़ा हैं। जिसमे एक लिनी पुत्तुसेरी नर्स भी शामिल है जोकि वह कोझिकोड़ के पेरम्बूरा हॉस्पिटल में असिस्टेंस नर्स थी।

    बताया जाता है कि वह निपाह से दूसरों को बचाते-बचाते खुद उसकी चपेट में आ गयी जिससे उसकी मौत हो गयी। वहां फैले इस वायरस की तह तक पहुंचने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक कमेटी बनाई है जो इस बीमारी के कारणों को पता लगाने में जुटी हुई है। ऐसे में अब यहां पर यह सवाल उठता हैं कि आखिर ये निपाह वायरस क्‍या है और यह फैलता कैसे है? इस वायरस से कैसे बचा जा सकता है? और यह वायरस भारत मे कैसे आया, यह बड़ा सवाल है?

    अभी हाल के कुछ वर्षों में अफ्रीका महादीप में फैला भयानक वायरस इबोला का मुख्य कारण चमगादड़ ही थे। वैसे तो कुत्ते के काटने से भी वायरस फैलता हैं इस वायरस को हम रेबीज नाम से जानते है यही वायरस चमगादड़ के काटने से भी फ़ैल सकता हैं।

    पहले भी मचा चुका है तबाही निपाह ?

    इस वायरस से फैलने वाली बीमारी अलग -अलग समय पर दुनिया में पहले भी तबाही मचा चुका है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे ने तीन नमूनों में निपाह वायरस की मौजूदगी पाई है। ये वायरस संक्रामक तौर पर महामारी का रूप ले सकता है। वही पर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ आर्गैनिजेसन ) के अनुसार निपाह वायरस (NiV) एक ऐसा वायरस है जो फलों के खाने से फैलती है, इस वायरस के कारण जानवरों एवं इंसानों दोनों ही स्तन धारियों में यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इस वायरस का मुख्‍य स्रोत Fruit Bat यानी कि यह ऐसे चमगादड़ हैं जो फल खाते हैं। ऐसे चमगादड़ों को Flying Fox के नाम से भी दुनिया मे जाना जाता है।

    कहां से आया निपाह वायरस?

    बताया जाता है कि इस खतरनाक और दुलर्भ वायरस का मामला सबसे पहले वर्ष 1998 में मलेश‍िया के कम्पांग सुंगाई के निपाह इलाके में सामने आया था। इस जगह के कारण ही इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। उस समय वहां पर दिमागी बुखार का संक्रमण फैल गया था। यह बीमारी चमगादड़ों से इंसानों और जानवरों तक में फैल गई थी। इस संक्रमण से होने वाले बीमारी की चपेट में आने वाले ज्‍यादातर लोग सुअर पालन केंद्र में काम करते थे। यह वायरस ऐसे फलों से इंसानों तक पहुंच सकता है जो चमगादड़ों के संपर्क में आए हों। यह वायरस संक्रमित इंसान से स्‍वस्‍थ मनुष्‍य तक बड़ी आसानी से फैल सकता है। बताया जाता है कि 2004 में यह निपाह वायरस बांग्लादेश में फैला। भारत के केरल में यह मामला पहली बार सामने आया है।

    इसके बाद वर्ष 2001 में बांग्‍लादेश में भी इस वायरस संक्रमित मामले उभर कर आए थे इस संक्रमण के फैलने की मुख्य वजह उस समय वहां के कुछ लोगों ने चमगादड़ों द्वारा खाये गए झूटे खजूर के खा लिए जिसके कारण यह उन झुटे खजूरों से यह वायरस ऐसे खजूरों को खाने वाले लोगों में फैल गया था।

    निपाह वायरस के लक्षण क्‍या हैं?

    निपाह वायरस के लक्षण दिमागी बुखार की तरह ही हैं। इस बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्‍कत जैसी परेशानी से प्रारंभ होकर भयानक सिर दर्द और फिर बुखार चढ़ने लगता है और इसके बाद दिमागी बुखार आता है।

    कैसे फैलता है निपाह वायरस?

    संक्रमित चमगादड़ों, संक्रमित सुअर या संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आने से निपाह वायरस फैलता है इस लिए ऐसे संक्रमणों से बचने के लिए ऐसे फलों एवं आस-पास पलने वाले सुअरों से दूरी बना कर चलना चाहिए।

    वायरस का इलाज क्‍या है?

    अब तक निपाह वायरस का कोई वैक्‍सीन नहीं बन पाया है। इस वायरस का एकमात्र इलाज यही है कि संक्रमित व्‍यक्ति को डॉक्‍टरों की कड़ी निगरानी में रखा जाए। फिलहाल शोध जारी है और शीघ्र ही कोई उपाय निकलने की उम्मीद है।

    क्‍या सावधानी बरतनी चाहिए?

    चमगादड़ों की लार या पेशाब के संपर्क में न आएं। खासकर पेड़ से गिरे फलों को खाने से बचें। इसके अलावा संक्रमित सुअर एवं ऐसे इंसानों के संपर्क में न आएं। जिन इलाकों में निपाह वायरस फैल गया है वहां जाने से बचे।

    …लेकिन डॉक्टर कफील के जज़्बे को सलाम

    बीआरडी मेडिकल गोरखपुर में पिछले साल चर्चा ऑक्सीजन सिलेंडर कि कमी से बच्चों की मौत से मीडिया की सुर्खियां बने डॉक्टर कफील जेल से बेदाग़ बाहर आने के बाद फिर इन दिनों चर्चा में हैं डॉक्टर कफील ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा की सहरी और फज्र की नमाज के बाद मैंने सोने की कोशिस की लेकिन मई सो न सका। निपाह वायरस के इन्फेक्शन से होने वाली मौतों और इसे लेकर सोशल मीडिया पर चलने वाली अफवाहों ने मुझे परेशान कर रखा है। मैं केरल के मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूं कि मुझे कालीकट मेडिकल कॉलेज में आकर निपाह वायरस से जूझ रहे मरीजों कि सेवा करने का मौका दें ताकि मैं कई लोगों की जाने बचा सकूं ।
    इस मामले में केरल के मुख्यमंत्री का जवाब 6 घंटे बाद आया और उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार बहुत खुश होगी अगर डॉक्टर कफील यहाँ आकर काम करेंगे।

    #निपाह वायरस

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