चार की हालत गंभीर, 25 लोगों को रखा गया निगरानी में
केरल, 21 मई। निपाह वायरस ने इस बार केरल के कोझीकोड में सनसनी फैला दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार अब तक इस निपाह वायरस से 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा 25 लोगों के खून में निपाह वायरस होने की पुष्टि हुई है। मृतकों में एक ही परिवार के चार लोग और इलाज में लगी एक नर्स भी शामिल हैं। बीमार लोगों में से चार की हालत गंभीर है। जबकि 25 लोगों को निगरानी में रखा गया है।
हालांकि, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने अभी सिर्फ तीन मौतों की पुष्टि की है। निपाह वायरस से हो रहे बीमारी के कारण केरल सरकार ने केंद्र से मदद मांगी है। जिसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने तीन एक्सपर्ट की एनसीडीसी की टीम को केरल भेजा है। इसके अलावा सूत्रो से खबर है कि नेशनल सेंटर फॉर डीसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की टीम केरल में निपाह वायरस प्रभावित इलाकों का दौरा भी करेगी।
चमगादड़ में पाया जाता है निपाह वायरस:
बताया जाता है कि निपाह वायरस चमगादड़ में पाया जाता है। पेड़ों में लटके चमगादड़ के माध्यम से ये फलों में और फलों से इंसानों में फैलता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की कमेटी वायरस की जानकारी जुटा रही है। पुणे वायरोलॉजी इंस्टीट्यूट ने खून के तीन नमूने लिए, जिसमें निफा वायरस होने की भी पुष्टि हुई है।
- क्यों पड़ा निपाह वायरस नाम: इस खतरनाक और दुलर्भ वायरस का मामला 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आया था। इस जगह के कारण ही इसे निपाह वायरस नाम दिया गया। पहले इसका असर सुअरों में देखा गया था। फिर 2004 में यह वायरस बांग्लादेश में फैला। भारत में यह केरल में पहली बार सामने आया है।
- क्या हैं लक्षण: निपाह वायरस की चपेट में आने से प्रभावित लोगों को सांस लेने की बहुत दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है. इतना ही नहीं वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर शख्स की मौत हो जाती है। अब तक इस वायरस से जुड़ी कोई वैक्सीन नहीं आई है।
- बचाव के रास्ते: इस वायरस से बचने के लिए फलों, खासकर खजूर खाने से बचना चाहिए। पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।







