वैज्ञानिकों का दावा: ब्रह्मांड के कई ग्रहों पर है एलियंस का बसेरा

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वैज्ञानिकों का दावा है कि सौरमंडल के बाहर हर तीसरा ग्रह धरती से बड़ा है और इन ग्रहों पर पानी की बड़ी मात्रा भी मौजूद

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2018: अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की अगर सच मानें तो हम लोग एलियन से चारों तरफ से घिरे हुए हैं। एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि हमारे सौरमंडल से बाहर हर तीसरा ग्रह धरती से दो चार गुना ज्यादा बढ़ा है और वहां काफी मात्रा में पानी भी मौजूद है। यही नहीं इन ग्रहों पर एलियन की मौजूदगी की संभावना भी है।

35 फ़ीसदी ग्रह धरती से बड़े:

सौरमंडल के बाहर 35 फ़ीसदी ग्रह धरती से बड़े हैं, इन ग्रहों का निर्माण भी ठीक उसी तरह हुआ है जिस तरह हमारे सौरमंडल के ग्रह बृहस्पति शनि और यूरेनस बने हैं। वर्ष 2012 में सौरमंडल के बाहर अन्य ग्रहों की तलाश शुरू हुई थी।

आश्चर्य है पानी का तापमान 500 डिग्री तक है:

वैजानिक शोध छात्र के मुताबिक यह पानी वैसा नहीं है। जैसा धरती पर आमतौर पर मिलता है। इसका तापमान 200 से 500 डिग्री सेल्सियस के बीच है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसी संभावना है कि ज्यादा गहराई तक जाने पर यह पानी उच्च दबाव वाली बर्फ में तब्दील हो जाते हैं।

मंगल पर था कई सौ साल पहले जीवन

लाल ग्रह पर जीवन की खोज करने में नासा को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्स पर कई सौ साल पहले जीवन होने के संकेत मिले हैं। मार्स पर ग्रह के पत्थरों से 3 अरब साल पुराने कार्बनिक मॉलिक्यूल्स मिले हैं। जिससे ये पता चलता है कि इसे कई सौ साल पहले यहां जिंदगी होने के सबूत के तौर पर देखा जा रहा है।

दरअसल, 2012 रोबोट एक्सप्लोरर मंगल ग्रह पर उतरे थे और तभी से वह वहां खोज कर रहे हैं। इस मामले में नासा ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से जानकारी दी कि मार्स में जीवन हो सकता है और इसके बेहतरीन प्रमाण भी मिल रहे हैं। हालांकि नासा के सौरमंडल अन्वेषक विभाग के निदेशक का कहना है कि अभी यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि इन मॉलिक्यूल्स का जन्म कैसे हुआ। लेकिन इसे अब तक मंगल पर जीवन होने का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।

अरबों साल पुराने कार्बनिक अणुओं के मिलने से मंगल पर जीवन की खोज में सहायता मिलेगी। – जेनिफर अगेन, ब्रांड वैज्ञानिक गोडार्ड, स्पेस सेंटर नासा

मंगल पर कई बार मिले जीवन के प्रमाण:
मेथेन का होना साल 2003 में यूरोपियन स्पेस एजेंसी के यान मार्स एक्सप्रेस में सबसे पहला मंगल ग्रह के वातावरण पर मीथेन गैस का पता लगाया था।

सोने की दीवार:

पृथ्वी की तरह मंगल पर भी उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ जमी हुई है लेकिन यह बर्फ पानी नहीं बल्कि जमीनी कार्बन डाइऑक्साइड से बनी हुई है। इसको हम आम भाषा में ड्राई आइस कहते हैं। इसकी खासियत है कि तापमान बढ़ने पर भी भी गलती नहीं है। यह यहां पर ड्राई आइस की खाई बन गई है। ऑल इमेज फोटो नासा ने भेजी जिसमें साफ दिख रहा है कि इन खामियों को एक सोने जैसी दिखने वाली दीवार नमाज संरचनाओं ने घेर रखा है।

मंगल पर पानी:

मंगल पर मिलने वाला अधिकांश पानी सिर्फ बर्फ के रूप में ही मौजूद हैं। हालांकि कुछ मात्रा में यह पानी वातावरण में भाग के रूप में भी मौजूद है। मंगल पर यह पानी जिस स्थान पर पाया जाता है वह दक्षिणी ध्रुव और उत्तरी ध्रुव है । वैज्ञानिकों का दावा है कि जब यह ड्राई आइस पिघल जाए तो ग्रह 35 फुट पानी में डूब सकता है।

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