जयपुर, 19 जुलाई : तस्वीरें खुद गवाह है। अजमेर का वक्त नहीं बदलता। ठहर गया है। बता दें कि हर साल बारिश में एक ही कहानी, बस हर तरफ पानी-पानी और नेताओं की झूठबयानी। कल आनासागर संयम बरते हुए था। आज पुरानी चौपाटी पर भी पानी सड़क पर आ गया। काला बाग के सामने एस्कैप चैनल सड़क पर बहने के कारण रास्ता बंद कर दिया गया है। चार तस्वीरों में दो पिछले साल की और दो आज की है। वही जगह वही हालात। यही अपने अजमेर का विकास है।
नेताओं के बयानों,भाषणों, बैठकों में तो आसमान छू रहा है,असलियत में एक इंच नहीं हो रहा। जब पिछले साल यही हुआ था,तो क्या- क्या आश्वासन दिए थे, दोनों विधायकों वासुदेव देवनानी और अनिता भदेल ने। ऐसा लगा मानो इस साल बरसात में बस शहर की धुलाई होगी और पानी बह जाएगा। सीवरेज,ड्रेनेज समस्या ही नहीं रहेगा। लेकिन बारिश बंद हुई,तो सब अपना अपना कहा भूल राजनीति में लग गए।
अजमेर दक्षिण तो एस्कैप चैनल का रास्ता होने और निचली बस्तियों के कारण सालों से डूबता रहा है। लेकिन अजमेर उत्तर नया डूब क्षेत्र बन रहा हैं। लेकिन राजनीति का हाल ये है कि किसके इलाके में कम-ज्यादा पानी भरा, इसी पर बहस है। विधानसभा सीटों ने शहर को बांटा,लेकिन नेताओं ने खुद और जनता को इसमें बांट दिया।
अगर आपने बीते 21 सालों में देवनानी-भदेल को शहर हित के साझा प्रयास करते देखा हो,तो स्मरण कीजिए। मुझे तो याद नहीं आता। दोनों मंत्री भी रहे। देवनानी अभी विधानसभा अध्यक्ष भी हैं। उनके सर्मथक कहते हैं कि अभी शहर में विकास की जो गंगा बह रही है,वह देवनानी का असर है। वो गंगा तो दिखाई नहीं दे रही,लेकिन विनाश के नाले जरुर बह रहे हैं। ये बरबादी किसका असर है,ये कौन बताएगा? हम से कारण मत पूछिए। कितनी ही बार लिख दिए। एक बार और सही। स्मार्ट सिटी के काम,आनासागर की हत्या,नाले- नालियों पर कब्जे और निर्माण, ड्रेनेज कीअनदेखी,अतिक्रमण की मार आदि-आदि। – ओम माथुर







