उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के तत्वाधान में आज पूरे प्रदेश भर से हजारों की संख्या में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंता अधिकारियों का एक विशाल सम्मेलन ‘‘विद्युत व्यवस्था में सुधार के उपाय‘‘ विषय पर फील्ड हास्टल पार्क राणा प्रताप मार्ग में प्रातः 11 बजे से आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेकर सम्मेलन को सम्बोधित किया।
उन्होंने आजादी के बाद आज पहली बार हजारों की संख्या में दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ता, अधिकारियों ने उपभोक्ता सेवा में व्यापक सुधार की शपथ लेते हुए प्रदेश के 3 करोड़ विद्युता उपभोक्ताओं से इस बात के लिये क्षमा मांगी कि पूर्व में उनके द्वारा कोई भी भूल चूक हुई है वह आगे नहीं होने पायेगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बिजली निगमों को आत्मनिर्भर बनाकर 90 हजार करोड़ का घाटा कम करते हुए व्यापक उपभोक्ता सेवा में सुधार के लिये अपना सम्पूर्ण योगदान देंगे।

इस मौके पर सम्मेलन में एसोसिएशन की तरफ से 5 मुख्य मांगे भी प्रदेश के ऊर्जा मंत्री को सौंपी गयी।
जिम्मेदारी तय होनी चाहिए:
पावर आफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा ईमानदारी से अभियन्ता और प्रबन्धन दोनों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, यदि प्रबन्ध निदेषक व चेयरमैन अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करते तो उन्हें भी रिवर्ट कर निदेशक बनाया जाये। जिस प्रकार से वर्तमान में अभियन्ताओं को रिवर्ट किया जा रहा है। डीएचएफएल मामले में अभियन्ता जेल गये लेकिन नौकरशाह बच गये। इसकी भी जवाबदेही तय हो। बिजली विभाग को आत्मनिर्भर बनाने के लिये अभियन्ताओं व पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को अपनी-अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि 70 हजार करोड़ का इन्तजाम प्रत्येक साल जब तक नहीं होगा, तब तक विभाग नो प्राफिट नो लाॅस में नहीं चल पायेगा। जहां राजस्व से हमे 59 हजार 517 करोड़ वसूलना है, वहीं वितरण हानियां कम करके 4500 करोड़ की बचत करना है। सरकार की तरफ से जहां 10 हजार करोड़ की सब्सिडी मिलती है, वहीं लाॅस फंडिंग सब्सिडी भी 2200 करोड़ की मिलती है। लेकिन विगत वर्ष 2019-20 पर नजर डालें तो केवल 44 हजार करोड़ राजस्व वसूला गया यानि कि 10 हजार करोड़ राजस्व कम। ऐसे में आगे पूर्ण राजस्व वसूल कर लाइन हानियां कम करके विभाग को आगे बढ़ाना होगा। वहीं सरकार व प्रबन्धन को एमओयू रूट के जो महंगे पावर हाउस हैं, जिनसे बिना बिजली खरीदे 4 हजार करोड़ देना पड़ रहा है।
आप किसी भी गलत कार्य में सहभागी न बनें: ऊर्जा मंत्री
ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने कहा जवाबदेही सभी की तय होगी अभियन्ता अधिकारियों पर हमें गर्व है। कोरोना काल में उनके द्वारा जो ऐतिहासिक कार्य किया गया वह हमेशा सराहा जायेगा। मंत्री व एमडी तो विभाग में टेम्पोरेरी है लेकिन आप सभी को इस विभाग में रहना है, आप किसी भी गलत कार्य में सहभागी न बनें और न किसी का टूल बने। सस्ती बिजली उपभोक्ताओं को देने के लिये रात दिन एक कर दें। विगत वर्ष में मेरे द्वारा जो अभियान चलवाया गया उससे लगभग 6 प्रतिशत वितरण हानियां कम हुईं,जिससे लगभग 2400 करोड़ का फायदा हुआ जिसका लाभ आम जनता को मिला।
उन्होंने कहा कि हमने अपने क्षेत्र में खुद 82 हजार स्मार्ट मीटर लगवाये लेकिन सही रूप से उसकी मानीटरिंग व तकनीकी खामियों के कारण फिलहाल अभी उसे रोकना पड़ा। इन सब दिशा में गम्भीरता से सोचना होगा।
इस मौके पर एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष व अध्यक्ष की तरफ से ऊर्जा मंत्री को भगवान बुद्ध का एक स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मध्यांचल कम्पनी के प्रबन्ध निदेषक सूर्य पाल गंगवार ने कहा सभी को मिल जुलकर तकनीकी अभियन्ताओं का लाभ लेकर आगे बढ़ना होगा और आज की नई तकनीकी के जमाने में उसका ज्यादा से ज्यादा लाभ उपभोक्ता सेवा में लेना होगा। उपभोक्ता देवो भवः की संस्कृति को चरितार्थ करते हुए उपभोक्ताओं का विश्वास जीतना होगा।







