लखनऊ , 29 अगस्त : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज कहा कि उनकी सरकार अगले पांच सालों में 70 लाख युवाओं को अपने कार्यक्रमो के माध्यम से रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगी।
योगी ने वह ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट ‘ योजना के जरिये रोजगार दिलाने की दिशा में आगे बढने के संकेत भी दिये।
मुख्यमंत्री ने यहां प्रथम ‘रोजगार समिट ‘ का उद्घाटन करने के बाद अपने सम्बोधन में कहा, ‘ ‘जिस तरीके से लोगों ने पूंजी निवेश के लिये उत्तर प्रदेश को चुना है। उनका जो रझान और उत्साह दिख रहा है….हमारा मानना है कि हमारे पास आने वाले पांच वर्षों के दौरान एक करोड नौजवान बेरोजगार होंगे, उसमें से 70 लाख को हम रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएंगे…अपने कार्यक्रमो के माध्यम से उपलब्ध कराएंगे। ‘ ‘
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने कृषि को रोजगार के साथ जोडा है। चूंकि कृषि बहुत बडा क्षेत्र है, लिहाजा इसमें रोजगार की अपार सम्भावनाएं हैं।
योगी ने कहा कि प्रदेश के 75 जिलों में बहुत से ऐसे हैं, जहां कोई परम्परागत उद्योग रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘ ‘हम क्या उत्तर प्रदेश के अंदर ऐसा कर सकते हैं कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के आधार पर प्रदेश का विकास करें। भदोही का कालीन उद्योग, अलीगढ का ताला उद्योग, मुरादाबाद का पीतल उद्योग आदि। वाराणसी के साडी उद्योग को कोई प्रोत्साहन नहीं मिला है। हम क्यों ना वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट को जोडें। ‘ ‘
उन्होंने कहा ‘ ‘हमें अपने युवाओं पर भरोसा करना चाहिये, जो विपरीत परिस्थितियों में भी मजबूती से खडा होता है। जब भी समाज के सामने संकट होता है तो युवा खडा होता है, मगर जब उसके रोजगार की बात आयी तो कोई ठोस काम नहीं हुआ। हमने नयी औद्योगिक नीति में रोजगार को खास महत्व दिया है। ‘ ‘
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 45-50 साल पहले उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रमिक का प्रवास कलकत्ता की तरफ होता था, मगर वहां की ‘यूनियनबाजी ‘ ने सब चौपट कर दिया। आज बंगाल की क्या स्थिति है। उत्तर प्रदेश उन राज्यों में से हैं जिसने श्रम कानूनों को सरल बनाया है, लिहाजा लोग इस सूबे से जुडकर कार्य करें।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र रोजगार का सबसे बडा स्रोत है। कम खर्च में थोडी सी तकनीक का इस्तेमाल करके कृषि उत्पादन क्षमता को तीन गुना तक बढाया जा सकता है। इससे किसानों की आय तीन गुनी हो जाएगी। हम जब तक तकनीक को नहीं अपनाएंगे, तब तक स्वावलम्बन नहीं होगा।
योगी ने कहा कि किसानों की कर्जमाफी के लिये उनके सामने तमाम वित्तीय चुनौतियां थीं। सरकार ने फुजूलखर्ची को रोका। अपने मंत्रियो से कहा कि अपने बंगले में रंगाई पुताई के अलावा और कोई काम नहीं कराएंगे और कोई नयी गाडी नहीं खरीदेंगे। इस तरह कुल 14 हजार करोड रपये बचाए गये।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश के 86 लाख किसानों का कर्ज माफ किया, ताकि उन्हें विकास की प्रक्रिया से जोडकर उनके अंदर विश्वास जगाया जा सके।







