संतोष में सुख की सीख देता प्रहसन
लखनऊ, 21 अगस्त। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बिम्ब सांस्कृतिक समिति ने आज शाम नाटक ‘घर की मुर्गी’ का मंचन किया। रामकिशोर नाग के लेखन और सरिता कपूर के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने दर्शकों को हंसाते हुए संदेश दिया कि सही नजरिया हो तो उपलब्ध चीजों को नकारना अनुचित है।
कहानी का सार
नाटक में व्यवसायी रामजी पश्चिमी संस्कृति पसंद करते हैं और अपनी पत्नी सरिता पर अक्सर व्यंग्य करते हैं। सरिता पारंपरिक और कुशल गृहणी हैं। कॉलेज के साथी किटी और प्रकाश मिलकर रामजी को सबक सिखाने की योजना बनाते हैं। रामजी आफिस में सेक्रेटरी रखते हैं।
आधुनिक वेशभूषा में आई मोना उन्हें आकर्षित करती है। घर का खाना उन्हें बेस्वाद लगता है, लेकिन मोना का बनाया वही खाना पसंद आने लगता है। रामजी पत्नी को पिछड़ा बताकर मोना पर प्रभाव जमाना चाहते हैं।
जब सरिता आफिस आने की बात करती है तो रामजी मोना को छुट्टी देकर भगा देते हैं। बाद में सरिता मायके जाने की इच्छा जताती है। रामजी खुशी-खुशी इजाजत देते हैं और मोना को घर बुलाते हैं। अंत में पता चलता है कि मोना असल में उनकी पत्नी सरिता ही हैं।
कलाकार और तकनीकी टीम
रामजी की भूमिका उज्ज्वल सिंह ने निभाई। सरिता और मोना का किरदार शालू तिवारी ने किया। प्रकाश व खेलावन बने आनन्द तिवारी, जबकि किटी का चरित्र प्रियांशी मौर्या ने प्रस्तुत किया। प्रकाश व्यवस्था तमाल बोस और संगीत ऋषभ पांडे के जिम्मे रहा। रंगमण्डल प्रमुख महर्षि कपूर के साथ प्रियांशी, शालू, उज्ज्वल, विकास सिंह और आनन्द तिवारी ने सहयोग दिया।
यह सरिता कपूर का निर्देशन का पहला प्रयास था। नाटक संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से हुआ।







