नई दिल्ली । गुजरात चुनाव के बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच इन दिनों संसद के शीतकालीन सत्र पर लेकर आरोप-प्रत्योराप का दौर शुरु हो चुका है। कांग्रेस ने मंगलवार को कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ वित्तमंत्री अरूण जेटली की टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सोमवार को सोनिया ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार कमजोर आधार पर संसद के शीतकालीन सत्र में व्यवधान पैदा करने की कोशिश कर रही है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में पार्टी के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा, वित्त मंत्री ने एक ऐसे शब्द का प्रयोग किया है जिसकी निंदा होनी चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। जो हम देख रहे हैं, वैसा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जवाबदेही से संसद में बचना चाह रही है। उन्होंने कहा कि संसद के नियमित सत्र महत्वपूर्ण होते हैं। शर्मा ने कहा,हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि संसद सत्र आहूत करने में राज्य के चुनाव कभी भी आड़े नहीं आए। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री का मंगलवार को का वक्तव्य बगैर विचार किए दिया गया था और उन्हें तथ्यों को जांच लेना चाहिए था। उन्होंने कहा,वह तथ्यात्मक तौर पर गलत हैं। उन्होंने कहा था कि वर्ष 2011 में इसी तरह की स्थिति थी,उनके इस वक्तव्य को हम खारिज करते हैं। मैं ऐसा इसलिए कह पा रहा हूं क्योंकि हमने बीते कुछ दशकों के रिकॉर्ड देख हैं, जो हमारे पास हैं और मैं कह सकता हूं कम से कम इस सदी में तो ऐसा कुछ नहीं हुआ।
शर्मा ने बताया कि वर्ष 2011 में संसद को आहूत करने की तारीख तीन नवंबर थी। मंगलवार जेटली ने कहा था कि संसद का शीतकालीन सत्र होगा।उन्होंने राजकोट में यह भी कहा था कि संसद के सत्रों की तारीख में चुनाव के मद्देनजर कई बार बदलाव किया जाता है। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस भी पहले ऐसा कर चुकी है। जेटली ने कहा था कि विपक्षी दल ने वर्ष 2011 में संसद सत्र में विलंब किया था।
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