उ. प्र. मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति चुनाव के प्रत्याशियों से पत्रकारों (मतदाताओं) के सवाल
नवेद शिकोह
लखनऊ, 27 मार्च। शोक सभा का मैसेज, निंदा, मांग इत्यादि का ज्ञापन/ प्रेस नोट जैसे काम तो “समस्त पत्रकार गण” बिना समिति के भी कर सकते हैं। चुनाव की घोषणा के अलावा समिति ने आम पत्रकारों की समस्याओं को जानने के लिए क्या कभी एक भी जनरल बाडी मीटिंग बुलाई ?
डीएवीपी की सख्त नीति और न्यूज प्रिंट पर जीएसटी लागू होने से 70% पत्रकारों की नौकरी पर तलवार लटकी। इस गंभीर मामले पर पत्रकार समितियां खामोश क्यों रहीं। डीएवीपी नीति और न्यूज प्रिंट पर जीएसटी मामले पर अपना मत क्यों नहीं रखा! (इस मामले से भले ही प्रकाशक जुड़े हों लेकिन इससे पत्रकारों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है।)
- पत्रकारों की अनुशासनहीनता को काबू करने के लिए क्या कोई गाइड लाइन बनाई। या निगरानी कमेटी बनाने जैसा कोई प्रयास किया!

- आर्थिक रूप से कमजोर पत्रकारों की मृत्यु पर परिजनों को 25 लाख की आर्थिक सहायता का सिलसिला बंद होने पर क्या कदम उठाया ? मृतक पत्रकारों के परिजनों के सहायतार्थ कोई राहत कोष बनवाने की कोशिश की गयी क्या?
- पत्रकारों के आवास संकट पर किसी समिति ने क्या कोई ठोस काम किया ?
- पत्रकार बीमा योजना में कितने पत्रकारों को इसका लाभ मिल रहा है? विगत वर्षों से आम पत्रकार ये इतनी सी बात जानना चाहते हैं। क्या कोई समिति बीमा लाभ लेने वालों की सूची सार्वजनिक कर सकी ?
- राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार कि स्वत: यूपी प्रेस क्लब की सदस्यता हो जायेगी। एक समिति ने पत्रकारों से ये वादा किया था। क्या ये वादा निभाया गया ?
- तुम्हारी समिति /नेतागीरी का एजेंडा क्या है?
- बताया जाता है कि संवाददाता समिति का गठन इसलिए हुआ था कि वो ये तय करे कि एक टाइम पर दो प्रेस वार्ताएं ना हों।
- अगर अभी भी समिति इतने ही दायरे तक सीमित है तो इंफॉर्मेशन टैक्नोलॉजी /सोशल मीडिया के इस दौर में इस काम की क्या जरुरत?
- यदि पत्रकारों के हितों के लिए समिति का गठन होता है तो जीतने के बाद पत्रकारों के हितों के लिए समिति के पदाधिकारी क्या-क्या करेंगे। बिन्दुवार बताने का कष्ट करें ?
- मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की नियमावली /संविधान स्पष्ट करें। स्पष्ट करें कि समिति आम पत्रकारों की समस्याओं को सुनने के लिए साल में कितनी जनरल बाडी मीटिंगस करेगी।
- समिति अपने मतदाताओं को इस बात का अधिकार दे कि यदि समिति चुनावी वादों/घोषणाओं के मुताबिक काम नहीं करती है तो पत्रकारों/मतदाताओं की मेजारिटी किसी भी समय संवाददाता समिति को भंग कर सकती है।







